इंदौर. राज्य शासन ने क्रिस्टल आईटी पार्क को यथास्थिति में बेचने का निर्णय ले लिया है। इसके बाद अब 15 एकड़ क्षेत्र में फैली जमीन और साढ़े पांच लाख वर्गफीट पर बने भवन का मूल्यांकन किया जा रहा है जिसके आधार पर टेंडर निकाले जाएंगे। टेंडर प्रक्रिया मई के अंतिम सप्ताह तक संभावित है।
हाल ही में राज्य शासन ने औद्योगिक केंद्र विकास निगम (एकेवीएन) को पत्र भेजा है जिसमें उसने भूमि और भवन को एक ही टेंडर के माध्यम से बेचने की बात कही है। लंबे समय से भवन निर्माण बंद पड़ा है। निर्माण पूरा करने के लिए चार बार टेंडर डाले गए थे मगर एकेवीएन की दरों पर कोई फर्म काम करने को तैयार नहीं है। जमीन बेचने के लिए भी टेंडर डाले गए थे लेकिन इसमें भी किसी ने रुचि नहीं ली।
इन्हीं बातों को लेकर पिछले महीने एकेवीएन ने राज्य सरकार को पत्र लिखा था और अगली कार्रवाई के निर्देश मांगे थे। हाल ही में राज्य शासन से मिले पत्र में एकेवीएन को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जमीन और भवन का मूल्यांकन कर उसे बेचन की प्रक्रिया की जाए। एकेवीएन के मैनेजर ए.एस. चौहान का कहना है आगे की प्रक्रिया के संबंध में मैनेजिंग डायरेक्टर प्रमोद अग्रवाल के निर्देशन में योजना बनाई जाएगी।
40 करोड़ खर्च हो चुके हैं : भवन को बनाने में अभी तक एकेवीएन 40 करोड़ रुपए खर्च कर चुका है। यह भवन आईटी क्षेत्र की कंपनियों के ऑफिस खोलने के लिए बनाया जा रहा है। पहले चरण में इसमें साढ़े पांच लाख वर्गफीट निर्माण होना था जो कर दिया गया। वर्तमान में करीब 20 करोड़ रुपए की फिनिशिंग का कार्य और बचा है। फिलहाल एकेवीएन सात लाख रुपए की लागत से कैप्सूल लिफ्ट लगवा रहा है। दूसरे चरण में दो लाख वर्गफीट निर्माण किया जाना था जो अब खरीदार कंपनी ही करेगी।
बीच में ही कंपनी से नाता तोड़ा था : सरकार की इस महत्वकांक्षी योजना का काम मई 2003 में नागाजरुन कंस्ट्रक्शन कंपनी ने शुरू किया था लेकिन धीमे निर्माण के कारण पिछले साल एकेवीएन ने कंपनी का ठेका निरस्त कर दिया था।
चार मजदूरों की मौत और चार कार्यपालन यंत्री बदले : तीन साल पहले लिफ्ट गिरने के कारण यहां चार मजदूरों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा शुरुआत से अब तक चार कार्यपालन यंत्री भी बदले जा चुके हैं।