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प्रोफेसर श्रीवास्तव को बनाया डायरेक्टर

इंदौर. श्री गोविंदराम सेक्सरिया विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (एसजीएसआईटीएस) को डीम्ड यूनिवर्सिटी बनाने को लेकर शासन व संस्थान प्रबंधन की खींचतान और बढ़ गई है। इसके चलते बुधवार को डॉ. स्वराजमल हूमड़ को हटाकर प्रो. आर.के. श्रीवास्तव को डायरेक्टर बना दिया गया। जानकार मानते हैं सारा झगड़ा इस प्रतिष्ठित संस्थान और इसकी डेढ़ हजार करोड़ से ज्यादा की संपत्ति को कब्जे में रखने का है। हालांकि सोसायटी सदस्य मानते हैं समस्या हमसे नहीं कतिपय निजी स्वार्थो से है।

संस्थान को लेकर वर्षो से चल रही खींचतान सोमवार को भोपाल में हुई शासी निकाय की बैठक में फिर सतह पर आ गई थी। बैठक में ही अध्यक्ष व तकनीकी शिक्षा मंत्री नागेंद्र सिंह ने डायरेक्टर को इस्तीफा देने का कहा और शासी निकाय के उपाध्यक्ष पी.डी. मूल्ये को हटा दिया। उसके बाद संस्थान के प्रोफेसर दो धड़ों में बंट गए और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल पड़ा। उधर, बैठक से लौटकर डॉ. हूमड़ डायरेक्टर की कुर्सी के बजाय पास ही सोफे पर बैठकर काम करने लगे। बुधवार दोपहर उन्हें हटाने का फैक्स इंदौर पहुंचा और शाम को प्रभार सौंपना पड़ा।

इसलिए हटाया

डायरेक्टर तकनीकी शिक्षा अरुण नाहर ने बताया सोमवार की बैठक में डॉ. हूमड़ ने ही इस्तीफा देने की इच्छा के साथ बताया था वे काम करने में परेशानी महसूस कर रहे हैं। बतौर डायरेक्टर उनकी नियुक्ति भी नियमानुसार नहीं थी। शासन ने तो 2004 में ही डीम्ड यूनिवर्सिटी बनाने का निर्णय कर दिया था। इसी सिलसिले में संस्थान में 50 करोड़ रुपए भी लगाए जबकि सोसायटी ने अभी तक 5 लाख की ही घोषणा की। दरअसल सोसायटी संस्थान पर कब्जा करना चाहती है इसलिए डीम्ड यूनिवर्सिटी बनाने में अड़ंगे डाल रही है। उधर, डॉ. हूमड़ ने कहा मुझे क्यों हटाया? शासन से पूछें।

मांगा 50 साल का हिसाब-किताब

17 अक्टूबर 07 शासी निकाय की 109वीं बैठक में 1954 में गठित सोसायटी द्वारा 50 साल में संस्थान पर खर्च रकम की जानकारी मांगी गई थी। उसके बजाय तत्कालीन डायरेक्टर ने मिनिट्स में लिख दिया ‘सोसायटी का रजिस्ट्रेशन यथावत रखा जाए।’ इस पर मंत्री ने आपत्ति ली और सुधारने को कहा, जिस पर डॉ. हूमड़ राजी नहीं हुए। उनका कहना था मैं डायरेक्टर नहीं था तबके मिनिट्स कैसे सुधार सकता हूं।

मामला उपाध्यक्ष का

श्री नाहर के मुताबिक उपाध्यक्ष को लेकर भी सोमवार को जमकर बहस हुई। उन्होंने अधिकार न होते हुए भी अनेक निर्णय लिए जिनका अनुमोदन भी शासी निकाय से नहीं कराया। इस पर मंत्री ने पूछताछ की तो डायरेक्टर ने माना उन्हें अधिकार नहीं थे लेकिन परम्परा के मुताबिक निर्णय लेते रहे और हम मानते रहे।

करोड़ों की संपत्ति का विवाद

जानकारों के अनुसार एसजीएसआईटीएस की जमीन ही 1500 करोड़ रुपए की है, बाकी संपत्ति और प्रतिष्ठा अलग। सोसायटी इसी पर हक जमाना चाहती है और सरकार छोड़ना नहीं चाहती।

शासन के नजरिये से सोसायटी भी स्तब्ध

सोसायटी के सदस्य अभयसिंह भरकतिया ने कहा शासन सोसायटी को जिस नजरिये से देख रहा है उसे लेकर हम भी स्तब्ध हैं। सोसायटी भी चाहती है संस्थान डीम्ड यूनिवर्सिटी बने। इसकी प्रक्रिया में हमने कभी कोई हस्तक्षेप नहीं किया। शासन को कोई आपत्ति है तो वह बात करे। कुछ निजी स्वार्थो के चलते विवाद खड़ा किया जा रहा है। सोसायटी से जुड़े तमाम मामलों पर बात करने के लिए अध्यक्ष पी.डी. मूल्ये से संपर्क नहीं हो पाया।





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