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हर परिवार को सीएफएल बल्ब

रायपुर. राज्य के 22 लाख 50 हजार बिजली उपभोक्ताओं को सीएफएल बल्ब मुफ्त दिए जाएंगे। यह योजना बिजली बचाने के लिए शुरू की जा रही है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल (सीएसईबी) का मानना है कि सीएफएल भविष्य में राज्य की काफी बिजली बचाएंगे।

योजना की शुरुआत राजनांदगांव जिले से 15 अगस्त 2008 को होगी। उसके बाद अन्य जिलों में इसका विस्तार किया जाएगा। 15 फरवरी 2009 तक सभी उपभोक्ताओं को सीएफएल बांटने का लक्ष्य है। सीएसईबी अध्यक्ष राजीब रंजन ने हैदराबाद की कंपनी बनियान इंडस्ट्री लिमिटेड को वर्कआर्डर कर दिया है। कंपनी सीडीएम क्लेम की प्रक्रिया में लगी है। बताते हैं कि उसका रजिस्ट्रेशन हो गया है।

योजना के अनुसार जिस मकान में सामान्य पीले बल्ब जलाए जा रहे हैं, वहां बोर्ड की तरफ से एक बल्ब पर एक सीएफएल दिया जाएगा। एक कनेक्शन में अधिकतम चार सीएफएल दिए जाएंगे। यानी 10 रुपए का पीला बल्ब देकर उपभोक्ता 150 रुपए का सीएफएल हासिल कर सकेगा।

सीएफएल घर-घर जाकर बांटे जाएंगे या कोई और रणनीति होगी, इसका खुलासा नहीं हुआ। हालांकि बोर्ड का मानना है कि घर पहुंच सेवा देनी चाहिए। इस योजना पर करीब 50 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। पर योजना में सीडीएम (कार्बन डिपाजिट मैकेनिज्म) के तहत खर्च पर अनुदान मिल जाएगा। इसके लिए अमेरिकन और स्वीडिश कंपनी के साथ करार किया जा रहा है। ये कंपनियां कार्बन के स्थान पर ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही हैं। यह विश्वव्यापी तकनीक है। प्रदूषण कम होने के साथ-साथ बिजली बचाने की दिशा में इससे बड़ी सफलता मिल रही है।

सीएफएल क्यों? : पीले बल्ब में बिजली की खपत अधिक होती है। आमतौर पर देखने में आया है कि 18 वाट के सीएफएल से करीब 60 वाट के पीले बल्ब के बराबर रोशनी मिलती है। अफसरों का अनुमान है कि सारे पीले बल्ब सीएफएल से रीप्लेस कर दिए गए तो घरेलू बिजली की खपत में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी आएगी।

लो वोल्टेज पर कंट्रोल : सीएफएल बल्बों का इस्तेमाल बढ़ने से कई क्षेत्रों में लो वोल्टेज की समस्या दूर हो जाएगी। सीएफएल से बिजली की खपत कम होगी। इससे ट्रांसफार्मर पर लोड कम होगा और उपभोक्ताओं को बराबर बिजली मिलेगी।





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