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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर.
गर्मी के बढ़ते प्रभाव को ध्यान में रखकर कानन पेंडारी प्रबंधन ने वन्य पशुओं के लिए खास व्यवस्था की है। अस्पताल में अपना इलाज करा रही बूढ़ी शेरनी ज्वाला को गर्मी से बचाने कूलर की ठंडी हवा दी जा रही है। इसी तरह अन्य पशु व पक्षियों के केज के ऊपर खस कवर डाले गए हैं, जिसमें हर आधे घंटे में पानी का छिड़काव किया जाता है।
पानी के छिड़काव में किसी तरह की लापरवाही न हो, इसे ध्यान में रखकर कानन प्रबंधन ने कुछ कर्मचारियों की भर्ती कर ली है, जो दिन भर केवल खस में पानी डालने का काम ही कर रहे हैं। अधिकतम तापमान में लगातार बढ़ोतरी ने सबकी हालत खराब कर दी है। ऐसे में मनुष्य और जीव-जंतु सभी छांव की तलाश में दिखाई दे रहे हैं। कानन पेंडारी के वन्यपशुओं की भी यही स्थिति है, लेकिन यहां उन्हें गर्मी से कोई दिक्कत नहीं है। कानन के लगभग सभी पशु-पक्षियों के केज में जालीदार बिछौना लगाया गया है। जिसमें पैरे की मोटी परत बिछाई गई है। गर्मी के दिनों में जंगल में रहने वाले जानवर तालाब व नदी के पानी में नहाकर अपनी गर्मी शांत करते हैं।
इसे ध्यान में रखकर विभाग ने भालू, तेंदुआ, सिंह व शेर के केज में पानी की बड़ी टंकियां बना दी हैं, जिसमें ठंडा पानी भर दिया जाता है। गर्मी में वन्य पशुओं को होने वाली परेशानी के संबंध में कानन के वन्य पशु चिकित्सक डा.पवन कुमार चंदन ने बताया कि पशुओं की स्थिति ठीक है, इन पर टेंप्रेचर का अधिक प्रभाव नहीं पड़ता। पक्षियों को 40 डिग्री के बाद दिक्कत होने लगती है। क्षमता से अधिक तापमान होने पर पक्षी अपना मुंह खोलकर शरीर की गर्मी बाहर निकालने लगते हैं। डा.चंदन ने बताया कि कानन पेंडारी में फिलहाल ऐसी कोई स्थिति नहीं है।
आर्टीफिशियल ‘एसी’
जानवरों को दी जा रही खस की ठंडक एसी से कम नहीं है। कानन में टेंप्रेचर की जांच करने के लिए अनेक स्थानों पर थर्मामीटर लगाए गए हैं। इस दौरान सभी जानवरों के केज में तापमान 30 से 35 डिग्री के बीच है। वन विभाग के अनुसार शहर में अधिकतम तापमान चाहे जो भी हो, लेकिन कानन में जंगल होने के कारण शहर की तुलना में यहां का तापमान करीब पांच डिग्री कम होता है। इसके बाद भी जानवरों को गर्मी से बचाने के लिए लगाए गए खस से केज में एक निश्चित तापमान दिया जा रहा है।
कम हुई जानवरों का खुराक
कानन में गर्मी के कारण जानवरों की खुराक कम कर दी गई है। शेर को सामान्य दिनों में नौ किलो मटन दिया जाता था, लेकिन इन दिनों सात किलो मटन ही दिया जा रहा है। इधर ज्वाला की तबीयत खराब होने के कारण उसकी खुराक काफी कम हो गई है। डाक्टरों ने उसकी खुराक पांच किलो बताई, लेकिन इसे सही बताया।