News
Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर.
सत्रह वर्ष पूर्व राज्य शासन द्वारा जौरा खुर्द में अधिग्रहण की गई करोड़ों रुपए की जमीन का मामला कोर्ट में पहुंच गया है। इस मामले में प्रदेश के एक केबिनेट मंत्री का नाम भी उछलता रहा है। हाईकोर्ट ने इस मामले में यथास्थिति (स्टे आर्डर)बनाए रखने का आदेश दिया है।
मुरैना जिले के जौरा खुर्द में 9.689 हेक्टर निजी भूमि चंबल आयाकट प्राधिकरण, आवासीय योजना के सार्वजनिक प्रयोजन हेतु राज्य शासन ने अधिग्रहण की थी। 14 मई 1991 को इस भूमि के संबंध में राज्य शासन ने अधिसूचना भी जारी कर दी थी। अधिग्रहीत भूमि के कुछ मालिकों ने उस समय मुआवजा तक ले लिया था। करोड़ों रुपए की इस भूमि शासन के नाम लंबे समय तक रही। कुछ वर्ष पूर्व इस जमीन पर भू-माफिया की नजर लग गई थी। इन्होंने जमीन को कब्जाने के लिए प्रदेश के एक केबिनेट मंत्री का सहारा लिया।
बताया गया कि उक्त मंत्री के हस्तक्षेप पर जुलाई 2007 में शासन से एक अधिसूचना जारी की, जिसमें इस बात का उल्लेख किया गया कि अधिग्रहीत की गई उक्त भूमि की शासन को आवश्यकता नहीं हैं। इस अधिसूचना के जारी होते ही भूमाफिया उस भूमि का नामांकन अपने पक्ष में कराने में जुट गए। इसकी भनक मुरैना जिले के कांग्रेसी नेताओं को लग गई थी।
इस मामले में मुरैना से लेकर भोपाल तक हंगामा मचा था। मुरैना के एक कांग्रेसी नेता ने हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में एक याचिका लगाई जिसमें कहा गया कि शासन ने जौरा खुर्द की अधिग्रहीत भूमि की आवश्यकता न बताकर जो अधिसूचना जारी की है, उसे निरस्त किया जाए। यह अधिसूचना जमीन कब्जाने वालों से मिलकर जारी कराई गई है।इस भूमि पर कई योजनाओं के तहत निर्माण कार्य होने थे।
याचिका की सुनवाई कर हाईकोर्ट ने उक्त भूमि के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश देकर राज्य शासन से कहा है कि वह दो सप्ताह में अपना जवाब प्रस्तुत करे।
विधानसभा में भी उठा था यह मामला
कांग्रेस ने इस मामले को बीते वर्ष विधानसभा में उठाया था, तब प्रदेश सरकार ने जांच कराकर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया था। मुरैना कलेक्टर ने राज्य शासन को पत्र लिखे जिसमें जौरा खुर्द की 9.689 हेक्टेयर भूमि के संबंध में जारी की गई अधिसूचना को निरस्त करने का आग्रह किया लेकिन शासन ने अधिसूचना अभी तक निरस्त नहीं की।
कई योजनाएं प्रस्तावित थी इस भूमि पर
जौरा खुर्द की उक्त भूमि पर कई योजनाएं प्रस्तावित थीं, इनके तहत वहां निर्माण कार्य किए जाने की भी तैयारी हो चुकी थी, लेकिन जमीन पर कब्जे के कारण काम नहीं शुरू हो सका। वहां न्यायिक अधिकारी व कर्मचारियों के 70 आवास बनना थे। स्वास्थ्य संबंधी योजना के तहत वहां एक भवन निर्माण भी प्रस्तावित था।