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अब मुआवजा दस लाख

जयपुर. सरिस्का अभयारण्य को आबाद करने के लिए रणथंभौर से ले जाकर छोड़े जाने वाले टाइगरों के संबंध में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) के वन्यजीव विशेषज्ञ गाइडलाइन तैयार करेंगे। सरिस्का एवं रणथंभौर अभयारण्य में बसे गांवों को शिफ्ट करने की कार्रवाई तेज की जाएगी। इसके लिए पैकेज राशि प्रति परिवार एक लाख से बढ़ाकर दस लाख कर दी गई है। कैलादेवी से रणथंभौर अभयारण्य तक बाघों के लिए कॉरीडोर बनाया जाएगा। भरतपुर के केवलादेव पक्षी अभयारण्य में गोवर्धन ड्रेन से पानी पहुंचाने के लिए 65 करोड़ रुपए की परियोजना स्वीकृत की गई है। वन एवं वन्यजीवों के लिए गठित राज्य की स्टीयरिंग कमेटी की बुधवार को यहां वन भवन में हुई बैठक में ये फैसले किए गए। बैठक कमेटी के अध्यक्ष एवं सांसद वी.पी.सिंह की अध्यक्षता में हुई।

कहां शिफ्ट होंगे गांव : सरिस्का अभयारण्य से 13 गांव एवं ग्वाड़े शिफ्ट होंगे। ये गांव करीब चालीस-पचास साल पुराने हैं। इनमें अभी केवल भगानी गांव के लोगों को बडरेद रूंध में बसाया गया है। पहले चरण में पांच अन्य गांवों कांकवाड़ी, भगानी, उमरी, क्रासका, हरिपुरा, रोटकेला के 600 परिवारों को बडरेद रूंध सहित अन्य स्थानों पर बसाया जाएगा। इन गांवों के लिए तिजारा, मौजपुर व मैथना रूंध में जमीन चिह्न्ति की गई है। ये गांव सरिस्का से 50 से 100 किमी दूर हैं।रणथंभौर अभयारण्य क्षेत्र से 12 और कैलादेवी से 42 गांव शिफ्ट किए जाएंगे। रणथंभौर के 2 गांव मोरडूंगरी व इंडाला के लिए आमली गांव में जमीन चिह्न्ति की गई है। दोनों गांवों में करीब 250 परिवार हैं। आमली गांव इनसे करीब 20 किमी दूर है। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव के अलावा पर्यटन आयुक्त उषा शर्मा, वित्त सचिव एस.के.मित्तल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक अभिजीत घोष, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक आर.एन.मेहरोत्रा, स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य राजपाल सिंह, वाल्मीकि थापर, बिलिंडा राइट्स आदि मौजूद थे।

कॉरीडोर में घूमेंगे बाघ

बैठक में तय किया गया कि इंटरनेशनल यूनियन ऑफ कंजरवेशन नेचर की ओर से निर्धारित दिशा-निर्देशों के आधार पर वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून के विशेषज्ञ गाइडलाइन तैयार करेंगे। इसके आधार पर टाइगरों को सरिस्का ले जाने की कार्रवाई होगी। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव परमेश चंद की मौजूदगी में यह फैसला किया गया कि रणथंभौर में सवाई मानसिंह सेंचुरी से कैलादेवी तक बाघों के लिए कॉरीडोर बनाया जाए। इस कॉरीडोर के बीच आने वाले गांवों के बाहर दीवार बनाई जाएगी। इस संबंध में हाल ही परमेश चंद एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक आर.एन.मेहरोत्रा ने इस क्षेत्र का दौरा भी किया था। इस कॉरीडोर को रामगढ़ विषधारी सेंचुरी से जोड़ा जाएगा।





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