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वजह बताए बिना याचिकाएं खारिज न करें: सुप्रीम कोर्ट

चंडीगढ़सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट को कोई याचिका खारिज करते वक्त उसके कारणों का जिक्र न करने पर फटकार लगाई है। अदालत ने हाईकोर्ट के ऐसा करने को ‘ऑर्डर्स विदाउट एप्लीकेशन ऑफ माइंड’ करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के खिलाफ यह सख्त टिप्पणी पंजाब हॉर्टीकल्चर विभाग के डायरेक्टर और अन्य वर्सेज जगजीवन प्रसाद केस में की।

डायरेक्टर की अपील पर तीन जजों जस्टिस अरिजीत परसायत, जस्टिस पी. सदाशिवम और जस्टिस आफताब आलम की बेंच ने फैसला देते हुए कहा कि हाईकोर्ट को याचिका डिसमिस करते वक्त उसके ठोस आधारों का जिक्र करना चाहिए।

बेंच का मानना था कि याचिका खारिज करने का कारण बताने से न केवल आदेशों में क्लैरिटी आती है बल्कि न्यायिक व्यवस्था में भी पारदर्शिता बनी रहती है। अदालत द्वारा कारण का जिक्र न करने से उस मसले पर जूडिशल रिव्यू की पॉवर का इस्तेमाल मुश्किल हो जाता है। कारण का जिक्र करना स्वस्थ न्यायिक व्यवस्था की निशानी है। कारण स्पष्ट होने से प्रभावित पक्ष को पता लग जाता है कि क्यों उसकी दलीलों को नकारा गया।

पंजाब में माली लगा था जगजीवन

जगजीवन प्रसाद को 1989 में पंजाब हॉर्टीकल्चर विभाग में माली भर्ती किया गया था। 1999 में नियुक्ति को नियमों के खिलाफ बताते हुए उसकी सेवा समाप्त कर दी गई। हालांकि लेबर कोर्ट ने जगजीवन को नौकरी से बर्खास्त करने के फैसले को खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ हॉर्टीकल्चर डायरेक्टर ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। डायरेक्टर की याचिका को हाईकोर्ट ने लेबर कोर्ट के आदेशों के पैरा 8 के आधार पर ही डिसमिस कर दिया, लेकिन कोई ठोस वजह नहीं बताई। डायरेक्टर ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर दी, जिस पर यह फैसला आया है।





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