आपस की बात.नलिनी नाम चौंकाता है? यह एक बहुत सामान्य नाम है, परंतु यदि यह नाम नलिनी मुरुगन हो तो वास्तव में चौंकाता है। पिछले दिनों यही नाम समाचारों की सुर्खियों में रहा। क्या आपने भी उसका नाम समाचारों में पढ़ा? शायद सभी लोग नलिनी को लगभग विस्मृत कर चुके थे, पिछले दिनों प्रियंका वाड्रा के उससे मिलने के बाद अचानक नलिनी का चेहरा और उसका हिंसात्मक गतिविधि में लिप्त होना याद आ गया। प्रियंका ने उससे पूछा तुमने मेरे पापा को क्यों मारा?
नलिनी मुरुगन वही युवती है जो देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव के कातिलों में से एक थी। वह उस षड्यंत्र में सक्रिय रूप में शामिल थी। एक तरह से उसका ब्रेन वॉश किया गया था, परंतु यहां इस दुर्दात घटना की नहीं, बल्कि नलिनी की चर्चा हो रही है। एक साधारण सी लड़की जिसे परिवार में प्यार नहीं मिला था। वह हमेशा डांट-फटकार सहती। मूलत: वह प्यार की भूखी थी। उसे जो भी जरा सा प्यार देता वह उसकी बातों में आ जाती।
उसे लगता कि तथाकथित स्नेह दिखाने वाला उसका सच्चा हितैषी है और वह उसे जो भी बात बता रहा है या सिखा रहा है उसे मानना चाहिए। नलिनी एक कंपनी में सेक्रेटरी की नौकरी करती थी, परिवार समृद्ध नहीं था, पर गरीब भी नहीं था। परिवार में एक ही सबसे बड़ी कमी थी कि परिवार में संवाद नहीं होता था। नलिनी से बहुत ज्यादा आशा और अपेक्षा की जाती। स्नेह, आत्मीयता के दो शब्द सुनने के लिए वह तरस जाती थी। कहते हैं कि नलिनी ने यह स्वीकार किया था कि प्यार पाने के प्रयास में ही वह इस राह पर चल पड़ी। नलिनी ही परिवार की नींव है।
मैं अपनी बेटी को इतना प्यार देना चाहती हूं कि उसे कोई बहला-फुसला न सके। वह कभी हिंसा के रास्ते पर न चले। वह अहिंसा की दूत बने। कहते हैं कि उसके पति मुरुगन को उसका यह बदलाव पसंद नहीं आ रहा। यदि इस कारण परिवार में दरार पड़ी तब नलिनी की बेटी क्या शांति दूत बन पाएगी?
नलिनी के बहाने परिवारों के सामने वही प्रश्न उठ खड़े हो जाना चाहिए। सामान्यत: स्नेह और आत्मीयता के दो बोलों के तरसते हुए बच्चे कई बार गलत हाथों में पड़ जाते हैं। उनके ऐसे दोस्त या सहेलियां बन जाते हैं, उनसे इतनी निकटता हो जाती है कि वे उनके बताए गलत रास्ते पर चल पड़ते हैं।
इससे भी खतरनाक स्थिति किसी आंटी या अंकल की किशोर व किशोरियों से निकटता, स्नेह बढ़ाने से हो सकती है। उनकी मानसिकता क्या है? उनके गुप्त इरादे क्या हैं, वे किस मंशा से इतने स्नेहिल हो रहे हैं? जब परिवार के बच्चे गलत कदम उठा लेते हैं या अप्रिय स्थिति में फंस जाते हैं तब उन्हें बचाने या चेताने का समय निकल चुका होता है।
नलिनी के बहाने संदेश तो यही है कि परिवार कुछ न दें, पर अपनी ममता, स्नेह की ठंडी छांव, अपने दो बोलों की मिठास और अपनी हथेलियों का स्पर्श चिकित्सा या एक्युप्रेशर जरूर करते रहें।