अटारी बार्डर
माहौल :
स्थान : अटारी बॉर्डर, वक्त सुबह साढ़े ग्यारह बजे
आंसुओं से भीगे चेहरे, रुंधे गले से निकलती आवाज, लेकिन नई उम्मीद के साथ आगे बढ़ते कदम। हर तरफ सरबजीत की रिहाई और उसके निदरेष होने की चर्चा व सही-सलामत वापसी की दुआएं। ऐसे माहौल के बीच सरबजीत का परिवार बुधवार को अटारी बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान रवाना हुआ। सरबजीत की बहन दलबीर कौर, बहनोई बलदेव सिंह, पत्नी सुखप्रीत कौर, बेटी स्वप्नदीप और पूनम नई सुबह की उम्मीद लेकर पाकिस्तान में दाखिल हुए। 18 साल के लंबे विछोह का दर्द और भविष्य की आशंकाओं का अक्स उनके चेहरों पर साफ झलक रहा था।
बर्नी ने किया स्वागत :
अटारी बॉर्डर पर सरबजीत के परिवार को विदा करने सैकड़ों लोग पहुंचे थे। उधर पाकिस्तान की ओर से उन्हें रिसीव करने पूर्व मानवाधिकार मंत्री अंसार बर्नी समेत कई नेता आए थे।
बहना का प्यार :
दलबीर अपने भाई सरबजीत की कलाई पर बांधने के लिए 18 वर्र्षो से सहेजकर रखीं राखियां ले गई हैं। इसके अलावा वे सरबजीत की पसंद के कई व्यंजन और मिठाइयां अपने हाथों से बनाकर ले गई हैं। इनमें पेठा, सोहन हलवा, मावे की बरफी, अचार और शरबत आदि शामिल हैं। दलबीर बगैर कुछ खाए-पिए ही पाकिस्तान गई हैं। उनका कहना था, ‘मैं आज भाई के साथ बैठकर ही भोजन करूंगी।’ दलबीर ने कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि उनके बेगुनाह भाई को पाक सरकार रिहा कर देगी। उन्होंने सरबजीत की रिहाई के लिए बर्नी के प्रयासों की सराहना भी की।
सुहाग का दर्द :
18 साल के बाद पति से मिलने की उम्मीद लेकर पाकिस्तान र्गई सरबजीत की पत्नी सुखप्रीत कौर ने कहा, ‘मेरी तो दुनिया ही वीरान हो गई थी। इतने लंबे समय तक मैंने खुद को और बच्चों को कैसे संभाले रखा, यह भगवान ही जानता है। हर करवा चौथ पर वे निराश जरूर होती थीं, लेकिन कहीं न कहीं से हौसला मिलता था कि उनका सुहाग एक दिन जरूर आएगा।’ बेटी स्वप्नदीप और पूनम का कहना था कि वे अपने पिता का चेहरा पहली बार देखेंगी। पिता क्या होते हैं, यह उनसे मिलने के बाद ही पता चलेगा।
इस्लामाबाद का वीजा नहीं :
एजेंसी के मुताबिक, सरबजीत के परिजनों को पाकिस्तान में ननकाना साहिब और लाहौर जाने के लिए सात दिन का वीजा दिया गया है। उन्होंने पाक राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ व अन्य पाकिस्तानी नेताओं से मुलाकात की अनुमति भी मांगी है, लेकिन उनका वीजा उन्हें इस्लामाबाद की यात्रा करने की इजाजत नहीं देता है, लिहाजा इस बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
गौरतलब है कि सरबजीत को 1990 में लाहौर और मुल्तान में हुए बम धमाकों के सिलसिले में फांसी की सजा सुनाई गई है। सरबजीत लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद है।