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सीनियर अधिक और जूनियर कम

भास्कर न्यूज.राजधानी हरियाणा.चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय हिसार में यह कैसी स्थिति है? यहां शिक्षकों का भारी टोटा, जबकि सीनियर पदों पर तय संख्या से अधिक तैनाती। यहां अध्यापकों के 1218 पद स्वीकृत है, लेकिन 851 शिक्षक ही तैनात है। दूसरी ओर विश्वविद्यालय में सीनियर के पदों पर स्वीकृत पदों से अधिक तैनाती है।

वहीं विवि के रजिस्ट्रार आरएस दलाल का कहना है कि भर्ती न होना, पदों को उन्नत करके सहायक प्रोफेसर तथा प्रोफेसर के पदों पर अध्यापकों की नियुक्ति करने की वजह से यह स्थिति बनी है। हम जल्दी ही इस स्थिति को ठीक कर लेंगे। विवि में वरिष्ठ वैज्ञानिकों, वैज्ञानिकों प्रोफेसर व सहयोगी प्रोफेसर के 310 स्वीकृत पदों पर 780 की तैनाती है। इस वजह से विश्वविद्यालय का शिक्षण ढांचा गड़बड़ा रहा है। जो शिक्षक तैनात किए गए, वे समय पर पदोन्नत हो गए, लेकिन खाली पद भरे ही नहीं गए।

इस वजह से सीनियर और जूनियर शिक्षकों के बीच गैप बढ़ता गया। इसका नुकसान शिक्षा, शोध, कृषि और किसान सभी उठा रहे हैं। शिक्षकों की कमी का खुलासा 2007 की कैग रिपोर्ट में हुआ। रिपोर्ट में शिक्षकों की कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। विवि में सहायक प्रोफेसर और सहायक वैज्ञानिकों के 908 पद है। इन पदों पर मात्र 71 सहायक प्रोफेसर और सहायक वैज्ञानिक है। सहायक प्रोफेसर और सहायक वैज्ञानिकों के पद खाली होने से जहां शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, वहीं शोध पर भी असर पड़ा। कृषि विशेषज्ञ डा. एसएस कुमार ने बताया कि एक पद से जब कोई पदोन्नत होता है तो उसके खाली पद पर जूनियर आता है। इससे शोध को एक दिशा मिलती है। तालमेल से शोध के बेहतर परिणाम मिलते हैं।

सीनियर अपने तजूर्बें से जूनियर को प्रशिक्षित करता है, जबकि जूनियर मौजूदा समय की दिक्कतों व चुनौतियों से सीनियर को अवगत कराता है। शोध की कड़ी इसी तरह से चलती है। डा. एसएस कुमार ने बताया कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में यह कड़ी ब्रेक हुई है। जाहिर है, इसका नुकसान तो सभी को उठाना पड़ेगा।





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