अम्बाला.
हाकी में कभी ‘वाल आफ चाइना’ के नाम से विख्यात त्रिलोचन बावा का अम्बाला कैंट की डिफेंस कालोनी में वीरवार को देहांत हो गया। वह 85 वर्ष के थे। त्रिलोचन बावा ओलंपिक की उस टीम में शामिल थे जिसने लंदन में भारतीय हाकी टीम को स्वर्ण पदक जिताने में अहम भूमिका अदा की थी। फिलहाल चंडीगढ़ में रह रहे त्रिलोचन बावा अम्बाला कैंट में अपनी बड़ी बेटी नवजोत कौर के घर कुछ दिन पूर्व आए थे। नवजोत के पति रिटायर्ड कर्नल वीएस मारवा ने बताया कि गुरुवार की सुबह अचानक ही उनका देहांत हो गया।
देश की तरफ से फुलबैक खेलने वाले त्रिलोचन बावा अपने पीछे पत्नी, दो बेटियां व एक बेटा छोड़ गए हैं। उनके सभी बच्चे सेटल हैं। शुक्रवार सुबह तोपखाना स्थित श्मशानघाट में ओलंपियन त्रिलोचन बावा का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
लंदन ओलंपिक में मिला नाम
12 फरवरी 1923 में जन्मे त्रिलोचन बावा ने विभाजन से पहले लाहौर में हाकी खेलना सीखा था। इसके बाद वह फरीदकोट की तरफ से हाकी खेलने लगे। विभाजन के बाद उन्होंने पंजाब पुलिस की तरफ से हाकी खेली और इसके बाद वह भारतीय हाकी टीम के मजबूत सदस्य बन गए। 1948 में लंदन में हुई ओलंपिक में उनका जलवा देखने को मिला जब फुलबैक खेलते हुए उन्होंने अपनी टीम के लिए गोल बचाए।
यहीं से उन्हें ‘वाल आफ चाइना’ के नाम से भी जाना जाने लगा। सन् 1958 तक त्रिलोचन बावा ने एशियन गेम्स, कामनवेल्थ गेम्स व अन्य महत्वपूर्ण मुकाबले खेले। इसके बाद वे पंजाब पुलिस में बतौर एसपी रहे। संयुक्त पंजाब के विभाजन के बाद हरियाणा में भी वह एसपी के पद पर रहे। त्रिलोचन बावा को प्रदेश का पहला ओलंपियन होने का भी गौरव हासिल है। पुलिस से रिटायरमेंट के बाद वह चंडीगढ़ के सेक्टर 45-ए में रहने लगे थे और बीते कुछ दिनों से अम्बाला कैंट में थे।
बेटा क्रिकेट कोच
पिता ने हाकी में देश के लिए खूब नाम कमाया तो बेटे ने क्रिकेट में। त्रिलोचन बावा का बेटा सुखविंद्र सिंह बावा चंडीगढ़ में क्रिकेट की कोचिंग देते रहे हैं। उन्होंने युवराज सिंह और वीआरवी सिंह को भी कोचिंग दी है।