भोपाल.
पानी की व्यवस्था करने के लिए शहर में कई प्रोजेक्ट बने। कोलार आवर्धन योजना पर अब तक काम पूरा हो जाना था लेकिन अभी तक पाइप जमीन के नीचे नहीं उतारे गए और वे जंग से नष्ट हो रहे हैं।
पर्ा्िकग की समस्या खत्म करने के लिए न्यू मार्केट में वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया लेकिन एक दर्जन स्थानों पर बहुमंजिला पर्ा्िकग बनाने की योजना पर काम शुरू नहीं हो सका।
समझ तो लो मुझे क्या और कैसा चाहिए
मेरे शहर के सभी भाग्य विधाताओं से मेरा एक ही सवाल है। वह यह कि राजधानी होने के बावजूद मैं आज तक पूरी तरह विकसित होना तो दूर, व्यवस्थित भी क्यों नहीं हो पाया हूं? मुझे मेरे विकास के लिए उठे कई कदम की ईमानदारी पर कोई शक नहीं, लेकिन अफसोस इस बात का है विकास के नाम पर कई ऐसे कदम भी उठे जो जनता के पैसे के विनाश का सबब बन गए।
क्यों कोलार आवर्धन जैसी योजनाएं अटक र्गई, क्यों एम्स का काम अब तक अधूरा है, ऐसे सवाल रह-रह कर मुझे सालते हैं और जवाब देने वाला कोई नजर नहीं आता। शहर का यातायात बदहाल है, सड़क दुर्घटनाओं में लोग मर रहे हैं और अब तक नए आउटर रिंग रोड व पहुंच मार्ग का काम ही पूरा नहीं हुआ है। अन्य सड़कें भी बदहाल हैं तो गाड़ियों की पार्किग की योजनाएं तक विभागीय खींचतान में अटकी हुई हैं।
मेरा विकास हर जन प्रतिनिधि का वायदा रहा, यह जनता की आस रही और मेरी भी यही इच्छा है। लेकिन कब सच होंगे वादे, कब पूरी होगी जनता की आस और कब मुझे इच्छा पूर्ति की खुशी हासिल हो सकेगी? दैनिक भास्कर के संवाददाताओं रत्नाकर त्रिपाठी और मनोज जोशी को मैने अपनी पीड़ा सुनाई है। अब इस सबसे बड़े अखबार के जरिए मेरी व्यथा आप तक पहुंचे तो कुछ कीजिएगा।
मैं हूं आपकी प्यारी राजधानी
बहुमंजिला पार्किग
नगर निगम एक दर्जन से अधिक स्थानों पर बहुमंजिला पार्किग बनाने की बात करता रहा है। शुरुआत में पुराने शहर में 10 स्थानों पर पार्किग स्थल विकसित करने की योजना थी, बाद में यह संख्या छह हुई और निगम को अब तक केवल तीन के लिए जगह आवंटित हो पाई है। यहां भी बहुमंजिला पार्किग के लिए फिलहाल कोई निश्चित योजना नहीं है। 1998 में एमपी नगर में बीडीए ने बहुमंजिला पार्किग बनाना शुरू किया था तो निगम ने आपत्ति ली और काम रोक दिया। जिम्मेदार कौन- नगर निगम
एम्स
केंद्र की एनडीए सरकार के कार्यकाल के अंतिम दिनों में राजधानी में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निर्माण की घोषणा हुई थी। 16 मार्च 2006 को वर्तमान केंद्र सरकार ने भी इसे मंजूर कर लिया। कछुआ चाल से योजना पर अमल के तहत 480 करोड़ रुपए की इस वृहद परियोजना के लिए साकेत नगर के पास जनवरी 2008 में 154 एकड़ जमीन अधिगृहीत हो चुकी है। निर्माण कार्य के नाम पर इस जमीन की सुरक्षा के लिए बस सीमा दीवार बनी हुई है, लेकिन बात है कि आगे नहीं बढ़ रही है।
ट्रांसपोर्ट नगर
पिछले 30 साल से ट्रांसपोर्ट नगर की बात चल रही है। नगर निगम ने जेएनएनयूआरएम के तहत कोकटा में ट्रांसपोर्ट नगर बना दिया, पर ट्रांसपोर्ट व्यवसायी अब तक वहां नहीं गए। वजह है यवसायी रियायती दरों पर प्लाट मांग रहे हैं, लेकिन नगर निगम इसके लिए तैयार नहीं है। यदि एक साल को भीतर व्यापारी कोकटा में शिफ्ट नहीं हुए तो निगम प्लाट की नीलामी कर सकता है। सरकार ने इसके लिए निगम को मंजूरी दे दी है।
जिम्मेदार कौन- व्यापारी जो रियायती दर पर जमीन की मांग पर अड़े हुए हैं।
..और ये खिलवाड़
समानांतर मार्ग न बनने से हमीदिया रोड पर बोझ
1996 में भूमिपूजन के बाद से अब तक इसका निर्माण पूरा नहीं हो सका है। हालत यह है कि लगभग एक किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर कहीं भी डामर नजर नहीं आता। अब यह स्थान प्राइवेट बस आपरेटर्स द्वारा अघोषित रूप से पार्किग के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। नगर निगम ने इस सड़क के निर्माण का काम पीडब्ल्यूडी को सौंप दिया है। 90 के दशक के अंत में जब निगम ने यह निर्माण शुरू किया था, तब यहां से हटाए गए विस्थापितों के पुनर्वास के नाम पर अनियमितताओं के कई आरोप लगे थे।
पं. खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद संस्थान की सुध नहीं
तत्कालीन राष्ट्रपति डा. शंकरदयाल शर्मा ने मौलाना आजाद कालेज ऑफ टेक्नोलॉजी (वर्तमान में एमएएनआईटी) परिसर में पं. खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद संस्थान के निर्माण का भूमिपूजन किया था। इस मौके पर उपस्थित लोगों के अनुसार डा. शर्मा ने आशंका जताई थी कि कहीं इस काम की हालत भी अनारकली के मकबरे की तरह न हो जाए। वही हुआ और संस्थान का भवन वहां आज तक नहीं बना है।
ली एसोसिएट्स का सर्वे कागजी बना
90 के दशक में शहर की यातायात व्यवस्था के सुधार पर विचार हेतु अंतरराष्ट्रीय संस्था ली एसोसिएट्स से सर्वेक्षण कराया गया था। इसमें कम से कम तीन फ्लाई ओवर बनाने सहित यातायात सुधार की कई योजनाओं की अनुशंसा की गई थी। अब इसकी रिपोर्ट ठंडे बस्ते में डाल दी गई है।
27 नए सब स्टेशन को जमीन का इंतजार
बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करने के लिए 27 नए सब स्टेशन प्रस्तावित हैं। विद्युत वितरण कंपनी द्वारा जिला प्रशासन को सौंपे गए प्रस्ताव के अनुसार 33 केवी के 9 और 33/11 केवी के 18 सब स्टेशन बनाए जाने हैं। कंपनी के अधिकारियों के अनुसार इस पूरी योजना पर 108 करोड़ रुपए खर्च होना है। कई बार अनुरोध के बावजूद जिला प्रशासन इनके लिए जमीन आवंटित नहीं कर सका है। वितरण कंपनी के अधिकारियों के अनुसार यदि समय रहते सब स्टेशन नहीं बने तो बिजली की मांग को पूरा करना संभव नहीं होगा।
28 साल में नहीं बनी सात किलोमीटर लंबी सड़क
हबीबगंज से मिसरोद तक होशंगाबाद रोड के समानांतर प्रस्तावित 7.10 किलोमीटर लंबी सड़क अब तक नहीं बन सकी है। इसके पहले चरण में हबीबगंज से दाना पानी रेस्त्रां तक ढाई किमी. सड़क बनना थी। इसके लिए पिछले साल 7 फरवरी को भूमिपूजन हो चुका है। अब तक कम से कम तीन बार टेंडर हो चुके हैं, पर सड़क की जमीन पर कब्जा हो जाने से इसका ले-आउट बदला गया है। बदली हुई परिस्थितियों में जनता कालोनी की ब्रांच सड़क पर से यह सड़क बनेगी, और हबीबगंज तिराहे पर आकर इसकी चौड़ाई कम हो सकती है।