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मालिक बेखबर, प्लॉट तीन बार बिक गया

इंदौर. बड़े अरमानों से प्लॉट खरीदा, रजिस्ट्री करवाई और घर बैठ गए। कुछ ही महीनों में उनकी संपत्ति का सौदा तीन लोगों के बीच हो गया जिनमें से दो के पास रजिस्ट्री भी मौजूद है।

मामला गुलाबबाग कॉलोनी, पीपल्या कुमार स्थित प्लाट-176 का है। 1500 स्क्वेयर फीट का 15 लाख का उक्त प्लॉट जेल रोड निवासी दीपक मुंशी ने रिजेंसी पैलेस निवासी रामेश्वर दयाल वर्मा से खरीदा और 31 दिसंबर 07 को रजिस्ट्री करवाकर कब्जा भी ले लिया। जैसे ही उन्हें प्लॉट के खरीदार मिले और बेचने की प्रक्रिया शुरू की तो वे सदमे में आ गए, जब उन्हें पता चला कि यह प्लॉट प्रीति पति मनोज कुमार वाधवा निवासी चिकित्सकनगर ने सुरेश पिता बाबूलाल सेन को बेच दिया।

जिसकी रजिस्ट्री भी हो गई। सुरेश सेन ने उक्त प्लाट एस.एस. चौधरी को बेचने की तैयारी कर ली और एडवांस भी ले लिया। इससे घबराए दीपक मुंशी ने जब प्रीति की रजिस्ट्री की फोटो कॉपी निकलवाई तो उन्होंने फर्जी रजिस्ट्री की शिकायत दर्ज करवा दी। श्री मुंशी का कहना है प्लॉट प्रीति के नाम कैसे हो गया समझ से परे है जबकि मालिक को संपत्ति कहां से आई इसकी जानकारी भी रजिस्ट्री में देना होती है जिसके बारे में कुछ भी नहीं लिखा गया। छानबीन में कई रोचक जानकारियां सामने आईं।

पति के कहने पर किए थे हस्ताक्षर

प्रीति वाधवा का कहना है उक्त प्लाट कैसे खरीदा मुझे इसकी जानकारी नहीं। पति मनोज वाधवा के कहने पर मैंने रजिस्ट्री पर केवल हस्ताक्षर किए थे।

फर्जी रजिस्ट्री का ठेका : मनोज वाधवा का कहना है मैंने पवन कुमार वर्मा पिता रामेश्वर कुमार वर्मा से उक्त प्लाट सात लाख में खरीदा था। जिसके एवज में उन्होंने पॉवर दिया था। बाद में मुझे पता चला कि इस प्लाट पर आठ लाख का लोन है और कागजात भी बैंक में रखे हैं। श्री वर्मा उसके बाद से भूमिगत हो गए। उनके ऊपर लाखों रुपए के कई बैंक लोन भी हैं।

सब कुछ जानते हुए भी उक्त प्लॉट को डेढ़ लाख रुपए में लेने के लिए सुरेश पिता बाबूलाल सेन तैयार हो गए। रजिस्ट्री कैसे होगी इसका उन्होंने ठेका देने की बात कही। जब उक्त संपत्ति का विक्रय हुआ तब पॉवर की समय सीमा खत्म हो गई थी। उन्होंने एक एग्रीमेंट पर यह लिखकर भी दिया था कि भविष्य में यदि कोई विवाद होता है तो वे ही इसके जिम्मेदार होंगे।

मेरा सिर्फ नाम था : इस मामले में जब बाबूलाल सेन से बात की तो उन्होंने कहा मेरा तो इसमें केवल नाम था। यह रजिस्ट्री कैसे हुई सब कुछ मेरे मित्र मोहनलाल कुशवाह ने कराया। श्री कुशवाह कहां हैं, वे इसकी जानकारी नहीं दे सके।

.. और अब अधिकारी भी घेरे में : उक्त रजिस्ट्री करने वाले अधिकारी भी शक के घेरे में आ गए हैं। बिना किसी संपत्ति के मालिक होते हुए किसी ने रजिस्ट्री कैसे करवा ली और अधिकारी ने इसे कैसे कर दी। इसका जवाब अधिकारियों को देना मुश्किल हो रहा है।

.. और जांच शुरू हो गई

रजिस्ट्रार मोहन श्रीवास्तव का कहना है कि उक्त मामले की शिकायत उनके पास आई है। वे जांच कर रहे हैं कि उक्त रजिस्ट्री कैसे हुई।





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