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सेना की भूमि पर नाजायज कब्जा

चंडीगढ़. सेना की ओर से ओल्ड ग्रांट पर दी गई करीब पांच करोड़ रुपए की रेजिडेंशियल लैंड पर आलीशान क्लब चल रहा है। अमृतसर कंटोनमेंट एरिया के बंगला नंबर सात में चल रहे इस ‘कैंट क्लब’ के मेंबर बड़े अधिकारी और फौजी अफसर हैं।

शायद यही वजह है कि क्लब के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर केवल फाइलें इधर से उधर की जा रही हैं जबकि कानूनन आर्मी की जमीन पर किए गए अवैध निर्माण को तुरंत गिराकर लैंड का कब्जा सेना को ले लेना चाहिए था।

गिफ्ट में मिला बंगला
2.29 एकड़ में बना बंगला नंबर सात ब्रिगेडियर आर. के. विज का था। उन्होंने यह इसे अपने दोस्त विरेंद्र सिंह ढिल्लों को गिफ्ट कर दिया। ढिल्लों ने 2004 में आर्मी से बंगले की मरम्मत की अनुमति ली और इसे क्लब में बदल डाला।

क्या कहता है कानून
पब्लिक प्रिमिसेस (पीपी) एक्ट के तहत सैन्य भूमि पर होने वाले अवैध निर्माण को आर्मी सील कर सकती है। कैंट क्लब के खिलाफ डिफेंस इस्टेट ने इस एक्ट का इस्तेमाल नहीं किया। इसके अलावा कैंट बोर्ड को अंडर सेक्शन 256 (केंट बोर्ड एक्ट) के तहत क्लब को गिराकर लैंड वापस आर्मी को सौंप देनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया।





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