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इंजीनियरिंग में हाईटेक उत्तरपुस्तिकाएं

रायपुर. स्वामी विवेकानंद टेक्निकल यूनिवर्सिटी पहली बार इस हाईटेक प्रणाली का प्रयोग कर रही है। उत्तरपुस्तिका में दो बार कोड सीट होगी। जिसमें छात्र से संबंधित पूरी जानकारी कोड में होगी। परीक्षा हाल में छात्र इसे भरेंगे। इसका एक हिस्सा फाड़कर लिफाफे में रख दिया जाएगा। दूसरा हिस्सा उत्तरपुस्तिका के साथ ही संलग्न होगा। यह ओएमआर सीट की तरह होगा। मूल्यांकन के बाद जांचकर्ता ओएमआर सीट में ही नंबर भरेंगे। इससे डाटा एंट्री आपरेटर की जरुरत खत्म हो जाएगी। अंकसूची में नाम की स्पेलिंग में होने वाली गलतियां भी नहीं होंगी।

नई टेक्नालाजी एडाप्ट करने में स्वामी विवेकानंद टेक्निकल यूनिवर्सिटी आगे है। यूनिवर्सिटी ने गोपनीयता, पारदर्शिता और सुविधा की दृष्टि से यह सिस्टम लागू किया है। सोमवार से शुरु हुई छठवें सेमेस्टर की परीक्षा में उत्तरपुस्तिकाओं का सिस्टम बदला गया। शिक्षक और छात्रों ने इसे अच्छा सिस्टम बताया। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस कोड को तभी डिकोड किया जा सकेगा जब बार कोड का दूसरा हिस्सा मिलाया जाएगा। यानि जब तक लिफाफे में बंद बार कोड से मिलान नहीं होगा, छात्र का नाम और विषय मालूम नहीं होगा। छठवें सेमेस्टर के 5000 छात्र इस नए तरीके से परीक्षा दे रहे हैं।

पहले दी गई ट्रेनिंग

इस सिस्टम को लागू करने से पहले टेक्निकल यूनिवर्सिटी ने सभी 16 इंजीनिरिंग कालेजों के प्राचार्यो को विशेष ट्रेनिंग दी। उन्हें बताया गया कि नए सिस्टम से मूल्यांकन और डाटा एंट्री में आसानी होगी।

साफ्टवेयर से होगी एंट्री

पूरा सिस्टम कंप्यूटराइज्ड होगा। साफ्टवेयर के जरिए छात्र के हर विषय का प्राप्तांक दर्ज हो जाएगा। इससे अंकसूची भी बन जाएगी। अंक सूची में हर सेमेस्टर का प्रतिशत, ग्रेड और रैंक दर्शाया जाएगा। इसके लिए एक कंपनी से प्रति छात्र 2 रुपए की दर से अनुबंध किया गया है। यदि प्रयोग सफल रहा तो यूनिवर्सिटी खुद ओएमआर मशीन खरीदेगी।

अंकसूची में एक छोटी सी गलती होने से छात्रों को कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। नए सिस्टम में इन सब से छुटकारा मिल जाएगा।

डा. बीके स्थापक, प्राचार्य टेक्निकल यूनिवर्सिटी भिलाई





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