News
Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. इंदिरा बैंक के दावा पत्रक को खातेदारों की संघर्ष समिति ने झूठ का पुलिंदा बताया है। उन्होंने इसकी विश्वसनीयता पर संदेह जताते हुए घोटाले में फंसे सीए के भी शामिल होने का आरोप लगाया है।
समिति के कन्हैया अग्रवाल, शैलेष श्रीवास्तव व अन्य सदस्यों ने बताया कि बैंक को बंद करने के उद्देश्य से घाटे को बढ़ाकर प्रस्तुत किया गया है। बैंक ड्राफ्ट का क्लैम 40 लाख रुपए प्रस्तुत हुआ है, जबकि 10 करोड़ रुपए के ड्राफ्ट की देनदारी पेश की गई है। बैंक का नुकसान षडयंत्रपूर्वक 22 करोड़ रुपए बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बैंक में घोटाला हुआ है, घाटा नहीं।
समिति ने आरोप लगाया कि ज्यादातर फाइलें बैंक से गायब कर दी गई हैं। सूचना के अधिकार के तहत भी जानकारी नहीं दी जा रही है। परिसमापक ने बैंक से ऋण लेने वालों की संपत्ति कुर्क कर नीलाम करने की घोषणा की, लेकिन नीलामी के दिन बंधक भूमि ही अस्तित्व में नहीं थी। धोखेबाजी से लोन लेने वालों के खिलाफ परिसमापक ने जुर्म तक दर्ज नहीं कराया। झूठे दस्तावेज बनाकर लोन देने वाले बैंक अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई नहीं की जा रही। उन्होंने अंदेशा जताया कि इसमें लिप्त कर्मचारियों ने लोन की नस्तियां गायब कर दी हैं।
सही या गलत डीआईसीजीसी तय करेगा : बैंक के परिसमापक एसके बेहार ने कहा कि दावा पत्रक की जांच डीआईसीजीसी सीए से करा रहा है। सही-गलत का फैसला वही करेगा। क्लैम लिस्ट केवल क्लैम लिस्ट होती है, इसमें लाभ-हानि का जिक्र नहीं होता। आडिटेड बैलेंसशीट अलग होती है। खातेदारों को जल्दी भुगतान के प्रयास किए जा रहे हैं।