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क्यों नहीं मिलता इंसाफ!

अजमेर. पुलिस की जांच में लापरवाही और पीड़ित महिला पर समाज का दबाव व शर्म की वजह से ज्यादातर मामलों में अभियुक्त सजा से बच जाते हैं। यह मानना है सरकारी पक्ष की पैरवी करने वाले वकीलों का।

वरिष्ठ वकीलों का मानना है कि कानूनी पेचीदगी और पश्चिमी देशों के कानून की नकल कर बनाए गए नए कानून यहां के सामाजिक परिवेश में सार्थक नहीं हैं, ऐसे में महिलाओं के प्रति अपराध करने वालों को सख्त सजा दिला पाना मुश्किल है।

ये हैं कारण
* सुप्रीम कोर्ट और मानवाधिकार आयोग के निर्देशानुसार महिलाओं के प्रति अपराध के मामलों की सुनवाई बंद कमरे में होना चाहिए, लेकिन कोर्ट रूम इतने छोटे हैं कि उसमें जज के केबिन ही नहीं हैं। आमतौर पर सुनवाई सबके बीच में ही हो रही है।
* घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 में आया लेकिन तीन साल बाद भी उसका प्रभावी क्रियान्वयन ही नहीं हो पाया है। जिलास्तर पर सहायता अधिकारी नहीं नियुक्त हो सके हैं। इस वजह अभी भी महिलाएं घरेलू हिंसा के लिए दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज करा रही हैं, जबकि नया कानून ज्यादा सशक्त है।
* न्याय प्रणाली में गवाहों की सुरक्षा और सहायता का कोई विशेष प्रावधान नहीं है। ऐसे में गवाहों को प्रभावित करना बहुत आसान हो जाता है। मामूली दबाव, डर और रुपए के लालच में गवाह प्रभावित हो जाते हैं।
* कई मामले लंबे चलते हैं, जिसके कारण गवाह तथ्य भूलने लगते हैं। छोटा सा शक पैदा होने पर ही आरोपी बच निकलता है।





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