उदयपुर.
परमाणु ऊर्जा विभाग को उदयपुर जिले के बांसड़ा व धावड़िया गांवों में प्राचीन लोहे और चूने के ढेर से देश में सबसे बढ़िया क्वालिटी का यूरेनियम अयस्क मिला है। दोनों जगह यूरेनियम के गाढ़ेपन के आधार पर असामान्य रेडियोएक्टिविटी रिकॉर्ड की गई है। यह खुलासा साइंस जर्नल ‘करंट साइंस’ के ताजा अंक में किया गया है। परमाणु बम बनाने और ऊर्जा के लिहाज से इस किस्म का युरेनियम मिलना काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस क्षेत्र में उच्च क्वालिटी का यूरेनियम होने की संभावना के बारे में स्थानीय प्रशासन को कोई जानकारी नहीं है।
परमाणु ऊर्जा विभाग के जयपुर स्थित एटोमिक मिनरल्स डिवीजन के वैज्ञानिक प्रदीप कुमार और उनके इस शोध के अनुसार इन दोनों गांवों से प्राप्त कच्ची धातुओं के नमूने विश्लेषण में 1.15 प्रतिशत यूरेनियम ऑक्साइड पाया है। यह देश में अब तक कहीं भी पाए गए कच्ची धातुओं के भंडार में सबसे बढ़िया क्वालिटी का माना जा रहा है।
एटोमिक मिनरल्स डिवीजन के वैज्ञानिकों ने उक्त गांवों में धातुओं के ढेर में यूरेनियम के गाढ़ेपन के आधार पर असामान्य रेडियोएक्टिविटी रिकॉर्ड की। बांसड़ा के सैंपल में जहां यूरेनियम ऑक्साइड का प्रतिशत 0.33, 0.225 और 1.15 पाया गया, वहीं धावड़िया से मिले सैंपल में यह प्रतिशत मात्र 0.04 रहा।
अब तक मेघालय में : अब तक देश में उच्च क्वालिटी के यूरेनियम अयस्क मेघालय में पाए गए हैं, जिसका प्रतिशत 0.1 है जबकि जादुगुड़ा में 0.06 फीसदी गुणवत्ता वाले यूरेनियम मिले हैं।
रेडियोएक्टिविटी के स्तर में परिवर्तन : बांसड़ा 24 डिग्री 35 नार्थ लैटिट्यूड व 70 डिग्री 09 ईस्ट लोंगिट्यूड में स्थित है।
महत्वपूर्ण होगी खोज
इधर, मुंबई में परमाणु ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने एक समाचार एजेंसी को बताया कि अगर इस क्षेत्र से यूरेनियम अयस्क के भंडार मिलते हैं, तो इस खोज को महत्वपूर्ण माना जा सकेगा। गौरतलब है कि राजस्थान के विभिन्न इलाकों में धातुओं के ढेर पाए जाते रहे हैं। ऐसे पुरा धातुओं के ढेरों में गहन अनुसंधान के बाद ही अधिकांश बेस मेटल स्रोतों की खोज हुई है। वैज्ञानिक प्रदीप कुमार के अनुसार द. राजस्थान खासकर उदयपुर, डूंगरपुर व बांसवाड़ा में ऐसी पुरा धातुओं के ढेर हैं, जिनकी खोज के जरिए महत्वपूर्ण खनिजों का पता किया जा सकता है।
1961-62 में मिले थे संकेत, अब आया नतीजा
* भींडर, दरीबा, वारी, बांसड़ा, नांगोली आदि क्षेत्रों में लौह-चूने के पुराने ढेर पाए गए हैं। बांसड़ा व धावड़िया गांव में पाए गए ढेर में रेडियोएक्टिविटी के बारे में 1961-62 में रिपोर्ट की गई थी। जयपुर के वैज्ञानिक टीबी प्रदीप कुमार, सोहेल फाहमी व एसके शर्मा ने यहां कुल 30 नमूनों का विश्लेषण कर मौजूदा रिपोर्ट बनाई है।
* विश्लेषण के आधार पर कहा जा सकता है कि रेडियोएक्टिविटी समान नहीं होने से धातु में यूरेनियम अयस्क का प्रतिशत भी असमान है। उच्च रेडियोएक्टिविटी वाले सैंपल में इसका प्रतिशत 1.15 है, जबकि मध्यम रेडियोएक्टिविटी सैंपल में 0.225 प्रतिशत व निम्न रेडियोएक्टिविटी नमूने में यूरेनियम केवल 0.030 प्रतिशत पाई गई।
* कई इलाकों में धातु-ढेर मिलना पुराने समय में कॉपर के लिए हुई स्मेल्टिंग के बाद के अवशेष माने जा रहे हैं। रेडियोएक्टिव तत्व कॉपर अयस्क का भाग प्रतीत होता है।