टोंक. जिले में वन की अंधाधुंध होती कटाई तथा वन्य जीवों के होते शिकार के चलते वन विभाग निष्क्रिय अधिकारियों के कारण विफल साबित हुआ है। लेकिन पर्यावरण प्रदूषण के खतरनाक होती स्थिति को देख ग्रामीण चेतने लगे हैं। ग्रामीण बद्रीलाल, गीता, मनभर आदि ने बताया कि अपनी सुरक्षा के लिए मानव को पेड़ों की सुरक्षा करना होगी इस संदेश के तहत हमने पेड़ों की सुरक्षा तथा वन्य जीवों को संरक्षण देने का संकल्प लिया है। गांव सोहेला सहित कई क्षेत्रों में लोगों ने पेड़ों पर कुल्हाड़ी नहीं चलाने व मोरों की रक्षा का संकल्प के साथ पेड़ों की पूजा अर्चना कर उनके रक्षा सूत्र भी बांधे हैं।
क्या है स्थिति
जिले के वन क्षेत्र का हाल यह है कि वह वन विभाग की निष्क्रियता के कारण असुरक्षित है। जिले में कुल वनक्षेत्र 335.96 वर्ग किलोमीटर है। पिछले चार वर्षो में वन विभाग द्वारा 2725 हैक्टर क्षेत्र में वृक्षारोपण तथा 7.46 लाख पौधों का वितरण किया गया। लेकिन वास्तविकता यह है कि वन विभाग द्वारा लगाए गए प्लांटेशनों में 20-25 प्रतिशत पौधे भी पनप नहीं पाए।
इसी प्रकार राष्ट्रीय पक्षी मोर के निरंतर मरने तथा घायल होने का सिलसिला जारी है। पिछले दो महीनें करीब 70 से अधिक मोर मर चुके हैं। लेकिन अब तक वनविभाग के अधिकारियों ने इनके कारणों का पता लगाकर उनकी सुरक्षा के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाए हैं। जब वन मंडल परिसर में रहने वाले एसीओ को जब अपने समीप लगी हाइटेक नर्सरी के बारे में ही जानकारी नहीं हो पाती है। तो वह जिले के वनों व वन्य जीवों की रक्षा कैसे कर पाएंगे, सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।