बीकानेर. ‘मुन्नाभाई’ को सरकारी कॉलेज ही मुफीद लगते हैं या निजी कॉलेजों के नकलचियों तक फ्लाइंग टीम की नजर नहीं पहुंच पाती, नकल प्रकरणों के कॉलेजवार विश्लेषण से यह सवाल खड़ा हो गया है।
इस मामले में डूंगर कॉलेज में परीक्षा देने वाले खासे परेशान है क्योंकि परीक्षा के एक सीजन में जितने परीक्षार्थी नकल करते हुए पकड़े जाते है उनमें 90 फीसदी इसी कॉलेज के होते है। यह बात गत तीन सालों के आंकड़े भी स्पष्ट कर देते हैं।
बीकानेर विश्वविद्यालय के अधीन बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और चूरू जिले में स्थित करीब 170 कालेज आते है। इनमें सरकारी, अनुदानित और निजी तीनों तरह की कॉलेज शामिल है। वर्ष 2005 से लेकर 2007 तक बीकानेर विवि को औसतन 120 से 130 नकल के प्रकरण मिले और इनमें से 90 फीसदी प्रकरण डूंगर कॉलेज के थे। वर्ष 2005 में डूंगर कॉलेज में नकल के 80, 2006 में 108, 2007 में 90 मामले बने। इस वर्ष अब तक करीब 70 छात्रों को नकल करते पकड़ा जा चुका है जबकि अभी तक कई परीक्षाएं होनी शेष है।
लगातार एक ही कॉलेज में इस तरह की कार्रवाई होने से छात्र संगठनों में भी आक्रोश व्याप्त हो रहा है। इन संगठनों का कहना है कि आखिर डूंगर कॉलेज में ही सबसे अधिक मामले कैसे बन रहे है जबकि अन्य सरकारी कॉलेजों में तो इक्का-दुक्का ही प्रकरण सामने आए है। निजी कॉलेजों की स्थिति तो नगण्य है। इस मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने बीकानेर विवि के कुलपति डॉ. सी.बी.गैना से भी बात की।
परिषद के प्रदेश सहमंत्री भगवानसिंह मेड़तिया का कहना है कि बीकानेर विवि के अधीन अनेक ऐसे कॉलेज है जिनका रिकार्ड आमतौर पर खराब ही रहता है, इसके बाद भी उन कॉलेजों में कोई मामला तक नहीं बनता। डूंगर कॉलेज में इस तरह के लगातार प्रकरण बनना कई सवाल खड़े करता है।