विशेष संपादकीय.
मैं बहुत ही ईमानदारी के साथ महसूस करता हूं कि चीजें तेजी से बेहतरी की ओर बढ़ रही हैं। मेरे इस यकीन को वे कुछ लोग गलतबयानी भी मान सकते हैं जिनकी मुल्क की हकीकत पर शायद पूरी पकड़ नहीं है। मैं यह नहीं कहता कि हमारी तमाम जरूरतें पूरी हो गई हैं, लेकिन निश्चित ही हालात अब पहले जैसे नहीं रहे। पैंतीस साल पहले मेरे अभिभावकों की मिडिल क्लास इन्कम और आज के मिडिल क्लास की इन्कम में जबर्दस्त फर्क आ गया है। आज मिडिल क्लास की न सिर्फ आमदनी बढ़ गई है बल्कि उसमें काफी तेजी से इजाफा भी हो रहा है। एक जमाना था जब आमदनी दो गुना होने में बीस से पच्चीस साल लग जाते थे। आज नौ साल का समय लग रहा है। आने वाले वक्त में शायद ऐसा दो या एक साल में होने लगे। हमारी जीवनशैली बदल गई है और हम अपनी बुनियादी जरूरतों से ऊपर उठकर खूबसूरत भविष्य में झांकने लगे हैं।
दुनिया की तमाम अर्थव्यवस्थाओं का अनुभव है कि लोग अपनी आकांक्षाओं के एक मुकाम पर पहुंच जाने के बाद मनोरंजन की ओर मुड़ जाते हैं। हिंदुस्तान भी उसी फेज में पहुंच गया है। जिंदगी की हरेक हरकत एक ईवेंट में बदल गई है। मीडिया की खबरें भी ईवेंट की नजरों से तौली जाने लगी हैं। इस लिहाज से मैं खुशनसीब हूं कि मनोरंजन की दुनिया से जुड़ा हूं। मैं कई बार अपने फोटोग्राफ्स अखबारों के पहले पन्ने पर छपा देखता हूं पर मुझे अच्छा नहीं लगता। मेरा मानना है कि जब मैं कुछ उल्लेखनीय या देश की तरक्की के लिए कर पाऊं तभी मेरे फोटो पहले पन्ने पर छपें। मेरे पिता कहते थे कि कुछ भी बनने से पहले एक अच्छा इंसान बनना जरूरी है।
एक एक्टर के रूप में आज मैं जो कुछ भी हूं या मैंने जो भी सफलता हासिल की है उसके पीछे सबसे बड़ा कारण मेरा एजुकेटेड होना है। मुझमें न तो असाधारण प्रतिभा है, न ही मैं खूबसूरत या भाग्यशाली हूं। ऐसा भी नहीं कि मैं कोई कड़ी मेहनत करता हूं। मैं सिर्फ पढ़े-लिखे होने के कारण ही अपने मौजूदा मुकाम पर पहुंचा हूं। कहना बड़ा आसान है कि समूचे देश को पढ़ा-लिखा होना चाहिए पर सोचना यह है कि इसे करके कैसे दिखाया जा सकता है। केबीसी के बाद ‘क्या आप पांचवीं पास से तेज हैं?’ कार्यक्रम इसी दिशा में मेरा एक प्रयास है।
जब भी मैं कोई अखबार पढ़ता हूं तो उसे पढ़ने के बाद मुझे महसूस होना चाहिए कि मैं पहले के मुकाबले ज्यादा शिक्षित और समझदार हो गया हूं । हर अखबार का अपना एजेंडा होता है, पर उसमें कुछ ऐसा भी होना चाहिए कि मैं अपने बेटे से कह सकूं कि समझदार बनने लिए अखबार पढ़ना जरूरी है। मैं जिंदगी में अगर कुछ सफल हो पाया हूं तो उसका एक कारण यह भी है कि मैं अखबार के हरेक पन्ने के बारे में समझ रखता हूं। अपने व्यावसायिक हितों को कायम रखते हुए भी अखबार लोगों को शिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं। जो अखबार आज आपके हाथों में है उसमें आप कुछ हद तक इस झलक को ढूंढ़ सकते हैं कि संपादक के तौर पर मैं किस तरह की खबरें और जानकारी भास्कर के पाठकों तक पहुंचाना पसंद करूंगा ।