बैतूल. किसी समय सूखे की मार झेल चुका सिपावा गांव आज मावे की खान बना हुआ है। गांव में मावे का इतना उत्पादन हो रहा है कि उसे बैतूल के अलावा छिंदवाड़ा, अमरावती और नागपुर जैसे बड़े शहरों में बेचा जा रहा है। इससे जहां किसानों की आमदनी बढ़ी है वहीं उनकी माली हालत में भी सुधार हुआ है। मुलताई ब्लाक मुख्यालय से 30 किमी दूर स्थित ग्राम सिपावा के हर दूसरे घर में दूध से मावा बनाने की भट्टी लगी है।
यहां के खंजरी सरोदे ने बताया कि उनके गांव में एक समय पानी की भारी किल्लत थी। हालात ये हो गए थे कि लोगों को सूखे की मार झेलनी पड़ी। इसी कारण कृषि का व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हुआ। इसके बाद गांव के किसान यहां दुधारू मवेशी पालने लगे। अब धीरे-धीरे गांव के सभी किसान मवेशी पाल रहे हैं और दूध का उत्पादन कर रहे हैं।
गांव के प्रह्लाद सरोदे, सखाराम कसारे, रामेश्वर प्रसाद सरोदे ने बताया कि गांव के किसानों ने घर में ही मावा औटाने के लिए भट्टी लगा रखी है। हर दूसरे घर में भट्टियां होने से मावे का उत्पादन भी बढ़ गया है। इसी कारण यहां के मावे की मांग बैतूल, मुलताई, पांढुरना, छिंदवाड़ा के अलावा महाराष्ट्र के अमरावती और नागपुर जैसे बड़े शहरों में भी है। किसानों ने बताया कि मावे का उत्पादन करने के अलावा किसान डेयरी में भी दूध सप्लाई करते हैं।
पानी के साथ खिलाते हैं मिठाई : आमतौर पर घरों में आने वाले मेहमानों को गांवों में पीने के पानी के साथ गुड़ या फुटाने दिए जाते हैं, लेकिन यहां मेहमानों को पानी के साथ मिठाई दी जाती है।
डेम बनने से होगा सुधार : सिपावा केदेवेंद्र बारंगे ने बताया कि गांव में शासन द्वारा एक डेम का निर्माण किया जा रहा है। आने वाले दिनों में गांव में पानी की उपलब्धता होने से किसान जहां कृषि क्षेत्र से जुड़ेंगे वहीं और अधिक मवेशी पालेंगे। इससे दूध उत्पादन में इजाफा होगा।