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बदल सकती है प्रदेश की तस्वीर और तकदीर

भोपाल. दिल्ली और मुंबई के बीच प्रस्तावित डेढ़ हजार किमी लंबा इंडस्ट्रीयल कोरिडोर मप्र की तकदीर और तस्वीर बदल सकता है, बशर्ते प्रदेश सरकार इसमें रुचि ले। इस इंडस्ट्रीयल कोरिडोर से दिल्ली-मुंबई मार्ग पर स्थित प्रदेश के नौ जिलों की 45 लाख आबादी को लाभ होगा।

इस वृहद परियोजना के पहले चरण में नीमच-नयागांव औद्योगिक क्षेत्र और पीथमपुर-धार-महू निवेश क्षेत्र को शामिल किया गया है। दूसरे चरण में शाजापुर-देवास औद्योगिक क्षेत्र और रतलाम-नागदा निवेश क्षेत्र को विकसित किया जाना प्रस्तावित है। जमीनी सच्चई यह है कि प्रदेश सरकार के किसी भी विभाग को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। नवंबर 2007 में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक स्टीयरिंग कमेटी बनी थी, लेकिन अब तक इस कमेटी की कोई बैठक नहीं हुई। जानकारी के अनुसार हरियाणा इसमें काफी आगे है। हरियाणा ने अपनी विस्तृत योजना बनाकर केंद्र सरकार को सौंप दी है।

केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त सलाहकार इंफ्रास्टक्चर डेवलपमेंट कापरेरेशन लिमिटेड ने एक रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें हर क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों और जरूरतों के अनुसार अलग-अलग औद्योगिक व व्यापारिक सुविधाएं विकसित करने की अनुशंसा की गई है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शामिल तुगलकाबाद और दादरी से जवाहरलाल नेहरु पोर्ट ट्रस्ट तक प्रस्तावित 1483 किमी लंबे फ्रेट कोरिडोर के साथ केंद्र सरकार इंडस्ट्रीयल कोरिडोर भी विकसित करने जा रही है।

पिछले साल अगस्त में इस दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रीयल कोरिडोर (डीएमआईसी) की घोषणा हुई थी। योजना के अनुसार फ्रेट कोरिडोर के दोनों ओर 150-200 किमी क्षेत्र में उद्योग व व्यापार के साथ अधोसंरचना विकास के कार्य किए जाने हैं। इन्हें 2012 तक पूरा होना है।

जापान के सहयोग से बनेगा डीएमआईसी

इस परियोजना के तहत दिल्ली से मुंबई तक जापान सरकार के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय स्तर का उत्पादन व व्यापार हब (मैन्युफेक्चरिंग एंड ट्रेडिंग हब) विकसित किया जाएगा। इसके तहत पूरे मार्ग पर मौजूदा औद्योगिक व निवेश क्षेत्रों को विकसित करने के साथ नए क्षेत्रों का विकास भी किया जाना है। योजनाकारों का मानना है कि यदि यह योजना सफल हो गई तो पांच साल में रोजगार की उपलब्धता दोगुनी, औद्योगिक उत्पादन क्षमता तीन गुनी और निर्यात चार गुना हो सकता है।

यह भी होगा डीएमआईसी में

डीएमआईसी में स्कूल, कॉलेज, प्रशिक्षण संस्थान, इंजीनियरिंग व तकनीकी संस्थान और शोध सुविधाओं से युक्त कॉलेज भी खोले जाएंगे। स्वास्थ्य व मनोरंजन सुविधाएं भी यहां विकसित की जानी हैं। जिन क्षेत्रों को डीएमआईसी में शामिल किया जाएगा, वहां तक पहुंच मार्ग बनाए जाएंगे, रेलवे लाइन विकसित की जाएगी और हवाईअड्डों का विकास होगा।

डीएमआईसी के बारे में प्रदेश सरकार को तत्काल कदम उठाना चाहिए। हमारा मानना है कि इसके लिए एक कोर ग्रुप बनाया जाए, जिसमें निवेशकों को शामिल किया जाए। इसके अलावा नए औद्योगिक व निवेश क्षेत्र की भी तलाश की जाना चाहिए।

-राजेंद्र कोठारी, रेसीडेंट डायरेक्टर पीएचडी चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज

-योजना का मास्टर प्लान तैयार हो रहा है। स्टीयरिंग कमेटी की बैठक अगले सप्ताह होने की संभावना है।

-सत्यप्रकाश, प्रमुख सचिव वाणिज्य एवं उद्योग

मप्र के इन जिलों को होगा फायदा

नीमच, धार, इंदौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, झाबुआ, उज्जैन, मंदसौर

कुल आबादी

45 लाख

पहला चरण

नीमच-नयागांव औद्योगिक क्षेत्रऔर पीथमपुर-धार-महू निवेश क्षेत्र

दूसरा चरण

शाजापुर-देवास औद्योगिक क्षेत्र और रतलाम-नागदा निवेश क्षेत्र





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Zainuddin
Sunday, 27th Apr 2008, 11:51
Really, It is the great chance for Madhya Pradesh to growth of state as well as Country.