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बहकी-बहकी बातें करता था आरक्षक

इंदौर. शास्त्रीब्रिज पर गोलियां चलाने वाला एसएएफ का आरक्षक धर्मेद्र पाठक तीन साल से मानसिक रोगी था। इसका पता बटालियन के कंपनी कमांडर को भी शुक्रवार रात चला, जब उसकी मां जमानत देने इंदौर पहुंची।

भोपाल के माता मंदिर क्षेत्र में रहने वाले 23वीं बटालियन ई-कंपनी के सिपाही धर्मेद्र के पड़ोसियों ने बताया उसका मानसिक संतुलन पिछले तीन साल से ठीक नहीं है। उसका इलाज भी चल रहा है। यही बात शुक्रवार रात इंदौर पहुंचीं कंपनी कमांडर दीपिका सूरी को धर्मेद्र की मां इमरती पाठक ने बताई। घटना का पता चलने पर वे जमानत देने के लिए शुक्रवार रात ही तुकोगंज थाने पहुंच गई थीं।

उन्होंने कहा धर्मेद्र कभी-कभी बहकी-बहकी बातें करता था। फिर डॉक्टर के ट्रीटमेंट के बाद दो दिन में वह ठीक भी हो जाता था। ऐसा पिछले तीन साल में तीन-चार बार हुआ पर ऐसी हरकत उसने कभी नहीं की। कमांडर सूरी ने झंडा चौक पर तैनात धर्मेद्र के साथियों से भी पड़ताल की तो पता चला 2 अप्रैल को इंदौर आने के बाद से उसका व्यवहार सामान्य था। तीन भाइयों में छोटे धर्मेद्र अविवाहित है। तीस साल से उसका परिवार भोपाल में रह रहा है। धर्म्ेद्र की बहन शादीशुदा है। उसके बड़े भाई संतोष जवाहर चौक और उनसे छोटे भाई बबलू पंचशीलनगर में रहते थे। कुछ समय पहले वे दोनों काम के सिलसिले में बड़वानी शिफ्ट हुए हैं। उनकी मां विध्यांचल भवन में नौकरी करती है। पति की मृत्यु के बाद उन्हें अनुकंपा नियुक्ति मिली थी।

डेढ़ साल पहले हुआ था भाई पर हमला : गिरफ्तारी के बाद धर्मेद्र ने कहा था उसके भाई संतोष पर हमला हुआ, इससे वह घबरा गया। यह बात उसकी मां ने भी मानी पर हमला डेढ़ साल पहले मोहल्ले के एक छोटे से विवाद के बाद हुआ था। उस घटना के बाद से धर्मेद्र को गहरा आघात हुआ था। अनुमान लगाया जा रहा है कि उसे शुक्रवार को दौरा पड़ा और भाई के हमले की बात याद आने के बाद वह गोलियां चला बैठा।

9 सजाएं पर गंभीर एक भी नहीं

2002 में धर्मेद्र एपीटीसी से 23वीं बटालियन में भर्ती हुआ था। बाद में वह स्पोर्ट्स में चला गया जहां उसने 7वीं बटालियन से अटैच होकर रेस्टलिंग की। कमांडर सूरी के मुताबिक कुछ माह पहले आए एक आदेश के आधार पर स्पोर्ट्स के सभी जवानों को मूल बटालियन में भेज दिया गया। उसके बाद इंदौर में धर्मेद्र की पहली पोस्टिंग थी। छह साल की सर्विस में उसे 9 सजाएं मिली हैं जिनमें अधिकांश गैरहाजिर होने की मामूली सजा है। इस वर्ष फरवरी तथा मार्च में भी वह गैरहाजिर हो गया था। ऐसी हरकत उसने पहली बार की है। मामले की जांच असिस्टेंट कमांडर अहिरवार कर रहे हैं।





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