लाहौर/इस्लामाबाद
लाहौर में सैकड़ों स्टूडेंट्स ने शुक्रवार को प्रदर्शन करसरबजीत को माफी नहीं देने की मांग की। स्टूडेंट्स ने विरोध मार्च निकाला और कहा कि पंजाब प्रांत में 1990 में हुए विस्फोटों के दोषी सरबजीत को माफी दिए जाने के सभी सरकारी प्रयास वापस लिए जाएं। प्रदर्शनकारियों ने पाक के पूर्व मानवाधिकार मंत्री अंसार बर्नी को भारतीय एजेंट करार दिया। ध्यान रहे कि बर्नी ने सरबजीत के हवाले से राष्ट्रपति मुशर्रफ को दया याचिका भेजी है।
स्टूडेंट्स का कहना था कि अगर सरबजीत को रिहा किया गया तो वे सरकार के खिलाफ आंदोलन चलाएंगे। प्रदर्शनकारी छात्र हाथों में बैनर और प्लेकार्डस लिए हुए थे।
परिजनों को नेताओं से आस :
पाक गए सरबजीत के परिजन शनिवार को आला पाक नेताओं से मिलने की आस लगाए रहे ताकि सरबजीत को माफी दिलाने की गुजारिश कर सकें, लेकिन उन्हें कोई रिस्पांस नहीं मिला। मंगलवार को लाहौर पहुंची दलबीर कौर ने कहा, पीएमएल-एन नेता नवाज शरीफ, इस्लामाबाद जाकर प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी से मिलने के अनुरोधों पर सरकार की ओर से अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत लौटने से पहले उन्हें अपने भाई सरबजीत से फिर मिलने का मौका मिलेगा। दलबीर ने कहा कि सरबजीत को माफी देने की याचिका पर पाकिस्तान का आंतरिक मंत्रालय और पीएम सेक्रेटेरिएट कब विचार करेंगे, इस बारे में कोई संकेत नहीं हैं।
नहीं मिले रिहाई के कागजात :
दलबीर ने बताया कि भारत ने अभी तक सरबजीत की रिहाई की अपील एवं अन्य कागजात पाक सरकार को नहीं भेजे हैं। भारत को 30 अप्रैल तक स्पष्ट करना चाहिए कि सरबजीत की रिहाई के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।