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बर्फीली चोटियों से लेकर रेगिस्तान तक दिन-रात देश की सुरक्षा कर रहे सेना के अफसर और जवान तो छठे वेतन आयोग की सिफारिशों से नाराज हैं ही, सेना के रिटायर अफसर भी इनसे नाखुश हैं। रविवार सुबह देश भर में एक साथ पहली बार रिटायर्ड सैन्य अफसर आयोग की सिफारिशों के खिलाफ ‘साइलेंट प्रोटेस्ट’ करेंगे।
इसी कड़ी में सेक्टर-3 स्थित वार मेमोरियल पर आर्मी और एयरफोर्स के छह रिटायर्ड जनरल विरोध का झंडा बुलंद करेंगे। पूर्व डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ ले. जनरल विजय ओबराय इसकी कमान संभालेंगे। उनके साथ ले. जनरल आरएस दयाल, ले. जनरल दीपेंद्र सिंह, ले. जनरल हरवंत सिंह, एयर मार्शल रंधीर सिंह और एयर मार्शल आरएस बेदी भी होंगे। ले. जनरल विजय ओबराय ने कहा, सेना के लिए वेतन निर्धारित करने के लिए गठित वेतन आयोग में सेना को शामिल नहीं किया गया। ऐसे में उम्मीद करना बेकार है। एयरकंडिशनरों में बैठ कर सेना की जमीनी हकीकत नहीं समझी जा सकती। ले. जनरल दीपेंद्र सिंह ने कहा, आजादी के पहले से सेना सरहदों की रक्षा कर रही है। इसके बावजूद हर वेतन आयोग में उसकी अनदेखी होती रही है। कई रिटायर्ड अफसरों व एसोसिएशनों का मानना है कि फौज का सड़क पर उतरना विरोध का सही तरीका नहीं है।
फौज अनुशासन की मिसाल है।
जज एडवोकेट ब्रांच से रिटायर्ड और सेवियर्स ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑफ आम्र्ड फोर्सेस पसरेनल एसोसिएशन के कर्नल एसके अग्रवाल ने कहा कि सरकार के किसी निर्णय से शिकवा है तो उस संबंध में सरकार को चेताने के कई तरीके हैं। हमने सेना प्रमुख और रक्षा मंत्री को वेतन आयोग के संबंध में पत्र लिख कर मांग उठाई है। वहीं ऑल एक्स सर्विसमेन वेलफेयर एसोसिएशन ने तो 27 अप्रैल के विरोध दिवस का बहिष्कार किया है। अध्यक्ष भीमसेन सहगल ने कहा कि वह सरकार के प्रतिनिधियों से मिल कर मांगों को हल करना ही बेहतर तरीका मानते हैं।
यह सही नहीं:
कॉमन पे स्केल सभी जवानों के लिए लागू होना चाहिए। वेतन आयोग ने1 जनवरी 2006 से पहले के भर्ती पीबीओआर के लिए इसे लागू नहीं किया है। वेतन आयोग ने जवानों के लिए एशोर्ड करिअर प्रोग्रेशन (एसीपी) 10 और 20 साल निर्धारित की है, जबकि सिपाही 17 साल की सर्विस के बाद रिटायर हो जाता है। रैंक पे को ग्रेड पे में शामिल नहीं किया गया, इससे अफसरों के लाभ ओर कम हो जाएंगे। मिल्ट्री सर्विस पे (एमएसपी) को वेतन में शामिल नहीं किया गया।
सैन्य अभियानों में 7923 शहीद
ले. जनरल विजय ओबराय ने बताया कि अगर भारत-पाक और चीन युद्ध को छोड़ दे तो विभिन्न सैन्य आपरेशन में ऑपरेशन ब्लू स्टार, विजय, पराक्रम, पवन, रक्षक, हिफाजत, ओर्जिड, राइनो, फॉल्कन मेघदूत और यूएन मिशन में 540 अफसर, 571 जेसीओज और 7923 जवानों शहीद हुए हैं। इसके अलावा 12129 गंभीर रूप से घायल और 2 अफसर और 14 जवान लापता हैं। देश के लिए कुर्बानी देने वाले इन रणबाकुंरों की अनदेखी युवाओं का सेना से मोह भंग कर रही है।