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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग ने आजाद चौक पर मिले सुरंग के मुहाने को बावड़ी करार देते हुए इसे संरक्षित करने के लिए नगर निगम को पत्र लिख दिया है। पुरातत्वविदों ने शहरभर में गुरुवार से फैली चर्चा के बाद कल निरीक्षण कर इसकी रिपोर्ट दी थी। इस रिपोर्ट को आधार बनाकर संस्कृति विभाग के संचालक ने निगम को पत्र लिखा। अब, निगम के अफसर भी रविवार को निरीक्षण करनेवाले हैं कि इसका संरक्षण किस तरह किया जाए।
अफसरों ने दावा किया कि सुरंग होने के कोई प्रमाण नहीं मिले। पुराना चौकोन कुआं और इससे लगी सीढ़ियां इसे बावड़ी घोषित करने के लिए पर्याप्त हैं। इसके पीछे कक्ष अथवा चैंबर भी मिले हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) के अफसरों ने भी इसे डेढ़ से दो सौ साल पुराना कुआं (बावड़ी) प्रमाणित किया है। एएसआई के पुरातत्वविद् डा. शिवाकांत वाजपेयी का कहना है कि पुराने कुएं से लगा 10 फीट लंबा तंग रास्ता है, जो सुरंग का संदेह पैदा करता है।
कुएं की दीवार से यह रास्ता मेहराबों वाली खिड़कियों से जुड़ा है। यह सड़क की ओर खुलता है, इसलिए माना जा रहा है कि बावड़ी आम लोगों के पानी भरने के लिए बनाई गई होगी। उनका कहना है कि वहां सुरंग नहीं होने के बावजूद इसका ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व कायम है। इसे संरक्षित किया जाना चाहिए। रिपोर्ट आने के बाद पुरातत्व विभाग अब इसके संरक्षण की दिशा में प्रयास तेज करेगा। अफसरों का कहना है कि पुराने डिजाइन वाला कुंआ पानी ही नहीं, पुरातात्विक महत्व के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसे संरक्षित करने नगर निगम को पत्र लिखा गया है। गौरतलब है कि इतिहासकार और पुरातत्वविद इसे बचाने का ऐलान कर चुके हैं।
दिनभर लगा तांता
पुरानी बावड़ी देखनेवालों का तीसरे दिन भी तांता लगा रहा। बावड़ी के सुरंगनुमा हिस्से को पत्थर और लकड़ी से पाट दिया गया है। लोग इस पर चढ़कर बावड़ी को कौतूहल से देखते रहे। वे इसे बचाने की बात भी करते रहे। तोड़फोड़ के दौरान सुरंग का पता चला तो इतनी भीड़ उमड़ी कि जिसका मकान है, वे आने-जाने वालों से हलाकान हैं।