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Chhattisgarh
Raipur Raipur कांकेर.
भारत खोज अभियान पर निकले कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी यहां भाजपा सरकार पर निशाना साधने से नहीं चूके। उन्होंने कहा कि रोजगार गारंटी योजना और इंदिरा आवास का लाभ भी आदिवासियों को नहीं मिल रहा है। श्री गांधी ने उद्योगों के लिए आदिवासियों के विस्थापन की खिलाफत की।
पहली दफे छत्तीसगढ़ आए राहुल गांधी ने सरगुजा से बस्तर तक आदिवासियों की जीवन शैली को करीब से देखने के बाद शनिवार शाम कांकेर के नरहरदेव स्कूल में पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि औद्योगीकरण का विरोध नहीं है। यह होना चाहिए, पर इसके लिए आदिवासियों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। उनकी बातें ईमानदारी से सुननी चाहिए। गौरतलब है, बस्तर इलाके में बड़े उद्योग प्रस्तावित हैं और बेदखली को लेकर वहां विरोध का स्वर उठ रहा है।
श्री गांधी ने कहा कि भारत की छवि दो तरह से बनी है। एक विकसित एरिया यानी शहर और दूसरा दूरस्थ पिछड़ा इलाका यानी आदिवासी क्षेत्र। हमारा शहरी सिस्टम दूरस्थ गांवों तक नहीं पहुंच रहा है। गरीबों के लिए केंद्र की योजनाओं का लाभ सही लोगों को नहीं मिल रहा है। आदिवासियों का जीवन स्तर नहीं सुधर रहा है। गरीबों की आवाज दबकर रह गई है। इस ओर पर्याप्त ध्यान देने की जरूरत है।
सलवा जुड़ूम पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान : नक्सलियों के खिलाफ सलवा जुड़ूम के मामले में श्री गांधी बोलने से बचते रहे। उन्होंने इतना जरूर कहा कि सलवा जुड़ूम पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ चुका है। वे इसका सम्मान करते हैं। इस मामले में लोगों की दो राय हो सकती है। नक्सलवाद के बारे में उन्होंने कहा कि यह कुछ लोगों का आवाज उठाने का तरीका हो सकता है।
डा. मनमोहन सिंह मेरे लीडर : खुद को प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किए जाने की मांगों पर श्री गांधी ने कहा कि यह किसी की निजी राय हो सकती है। डा. मनमोहन सिंह मेरे लीडर हैं। मेरा समर्थन प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह को है। उन्होंने खुद को युवराज कहे जाने पर भी एतराज किया और कहा कि डेमोक्रेसी में हर कोई एक समान है।
चुनाव में अच्छा परिणाम आएगा : श्री गांधी ने दावा किया कि 6 माह बाद होने वाले छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में अच्छे परिणाम आएंगे। उन्होंने कहा कि मेरा काम सबको सुनना है और चुनाव का काम पार्टी देखेगी। राजनीति में तनाव की स्थिति भी बनती है। विश्वास है कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस अच्छा काम करेगी।
गुटबाजी पर सामी को आगे किया : श्री गांधी से प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी को लेकर सवाल हुए तो उन्होंने पास बैठे केंद्रीय राज्यमंत्री व प्रदेश प्रभारी वी नारायण सामी को आगे कर दिया। श्री सामी ने कहा कि भाजपा शासन में कांग्रेस तीन उपचुनाव हारी है तो तीन जीती भी है। माहौल कांग्रेस के पक्ष में है। एक माह के भीतर प्रदेश कांग्रेस की कार्यकारिणी घोषित कर दी जाएगी। यहां पुरानी कार्यकारिणी काम कर रही है।
आदिवासियों के साथ खाया कोदो भात
अंतागढ़. कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने यहां आदिवासियों के बीच बैठकर उनके साथ दोना पत्तल में आदिवासी भोजन का स्वाद लिया। उन्हें कोदोभात, हिरवा दाल, कांदाभाजी, कुल्थी सब्जी, जीर्रा चटनी के अलावा मडिया पेज परोसा गया। थोड़ा-थोड़ा कर तीन बार कोदो भात लिया तथा एक गिलास मड़िया पेज पीया। जीर्रा चटनी के विषय में कहा कि यह बेहद तीखी है। कार्यक्रम स्थल में आदिवासी महिला-पुरुषों से चर्चा के बीच कोई भी स्थानीय नेता आने की कोशिश करता तो राहुल स्वयं उन्हें दूर रहने कहते थे।
सुरक्षा घेरा दो बार तोड़ा
कांग्रेस महासचिव तथा पार्टी के ट्रंप कार्ड माने जा रहे राहुल गांधी ने सरगुजा और बस्तर, दोनों जगह अलग-अलग इच्छाएं जताकर सुरक्षा घेरे में अफरातफरी मचा दी। राहुल सरगुजा के लैंगा गांव में एक घंटे रहे। यह उनके कार्यक्रम में नहीं था। यही नहीं, आज सुबह राहुल ने ये कह दिया कि वे जमावाड़ा हेलिकाप्टर नहीं बल्कि सड़क मार्ग से जाएंगे। इस मार्ग से नक्सलियों का भी आना-जाना है, इसलिए आनन-फानन में सुरक्षाकर्मी लगाने पड़े। डीजीपी विश्व रंजन ने एसपीजी के डीजीपी को यह रिपोर्ट दे दी है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि राहुल ने पूरे प्रवास के दौरान कहीं भी सरप्राइज विजिट नहीं की।
लैंगा में ठहरने या जमावाड़ा तक कार से जाने की इच्छा उन्होंने पहले ही जता दी, इसलिए फोर्स के इंतजाम में मुश्किल नहीं हुई। सूत्रों ने बताया कि जब राहुल का काफिला अंबिकापुर से निकला, तभी सुरक्षा दस्तों को अंदेशा हो गया था कि वे किसी भी गांव में अचानक रुक जाएंगे।
इस वजह से दो बड़े वाहनों में करीब 100 हथियारबंद जवान काफिले के साथ ही रवाना कर दिए गए। लैंगा में इन्हीं जवानों ने सुरक्षा घेरा बनाया। ये नहीं जाते तो वीवीआईपी की सुरक्षा में परेशानी आ सकती थी।
डीजीपी की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जगदलपुर से जमावाड़ा का रास्ता कच्च है। यह इलाका नक्सल प्रभावित तो नहीं है, लेकिन नक्सली आते-जाते हैं। कच्चे रास्ते में लैंडमाइन का खतरा रहता है, इसलिए जैसे ही राहुल ने सड़क मार्ग से जाने की इच्छा जताई, एंटी लैंडमाइन गाड़ियों और ट्रेंड स्टाफ को झोंक दिया गया। राहुल का काफिला गुजरने से पहले पूरे मार्ग का चप्पा-चप्पा छाना गया, ताकि कोई खतरा न रहे। गौरतलब है, मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने गुरुवार को कहा था कि राहुल अगर बस्तर के धुर नक्सल प्रभावित इलाकों में भी जाएं, तब भी उन्हें सुरक्षा दी जाएगी, बशर्ते सूचना पहले से मिल जाए। वे सुरक्षा घेरा तोड़ सकते हैं, इस अंदेशे से जगदलपुर से निकलनेवाले चारों मार्गो पर एहतियातन फोर्स लगा दी गई थी।