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भजन का चुनाव लड़ना रणनीति

चंडीगढ़आदमपुर से भजन लाल को उम्मीदवार बनाने का निर्णय काफी कशमकश के बाद लिया गया है। जनहित कांग्रेस की यह सियासी रणनीति है। हालांकि कार्यकर्ता इस सीट से कुलदीप बिश्नोई को उम्मीदवार देखना चाहते थे। कार्यकर्ताओं का मानना था कि आदमपुर सीट से यदि कुलदीप बिश्नोई जीतते हैं तो विधानसभा में और बाहर बेहतर तरीके से हुड्डा सरकार को घेर सकते हैं। इतना ही नहीं विधायक के तौर पर कुलदीप बिश्नोई अपनी पार्टी की जड़ प्रदेश में मजबूत कर सकते थे।

इसी सोच के चलते कार्यकर्ता उन पर चुनाव लड़ने का दबाव बना रहे थे। कुलदीप बिश्नोई भी समझते हैं कि यह उनकी पारंपरिक सीट रही है। जहां अपेक्षाकृत चुनाव जीतना काफी आसान काम है। इसलिए यहां से कुलदीप का खड़ा होना सेफ गेम था। लेकिन जिस कड़े मुकाबले में हजकां फंसी है, उसमें कुलदीप बिश्नोई का उम्मीदवार बनाना उन्हें एक क्षेत्र में सीमित करने जैसा हो सकता था।

ऐसे में उनके पास दूसरे क्षेत्रों में चुनाव प्रचार करना कठिन होता। वैसे भी प्रदेश के मतदाता भजन लाल की बजाय कुलदीप बिश्नोई को अधिक पसंद करते हैं। यह बात कुलदीप बिश्नोई और उनके थिंक टैंक जानते हैं। यही वजह रही कि उन्होंने कुलदीप को आदमपुर में सीमित करने की बजाय, उपचुनाव के लिए फ्री रखा। ऐसे में अब कुलदीप उपचुनाव में प्रचार की बागडोर अपने हाथ में ले सकते हैं। अब वे इंद्री और गोहाना में बेहतर तरीके से चुनाव प्रचार कर सकते हैं।

इसी रणनीति के चलते हजकां ने कुलदीप बिश्नोई को आदमपुर से खड़ा करने की बजाय चौधरी भजन लाल को उम्मीदवार बनाया है। बहरहाल अब यह देखना होगा फ्री होने के बाद अब कुलदीप बिश्नोई मतदाता को हजकां के साथ कितना जोड़ पाते हैं।





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