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हाथियों के लिए फिट नहीं ‘गांव’

जयपुर. आमेर विकास एवं प्रबंध प्राधिकरण (एडीएमए) की ओर से लगभग 5 करोड़ की लागत से हाथियों के लिए बनाए जा रहे ‘हाथी गांव’ की महत्वाकांक्षी योजना पर पानी फिरने की नौबत आ गई है। इसकी अहम वजह मौजूदा जगह पर पानी की कमी है।

इसी पहलू को लेकर कराए गए सर्वे की रिपोर्ट में सामने आया है कि हाथियों के प्रोजेक्ट के लिहाज से यहां पानी बेहद कम है। दूसरा, विशेषज्ञों के अनुसार हाथी गांव में उनके आशियाने भी नियमों के हिसाब से फिट नहीं हैं। इनमें न केवल प्रति हाथी के लिए जगह कम है, बल्कि हाथियों को अलग-अलग रखने का विचार भी आगे सिरदर्द बन सकता है।

हाथी गांव की नींव रखने से पहले ही पानी की किल्लत से विभाग वाकिफ था, लेकिन आज तक इस मर्ज की दवा नहीं ढूंढी गई। इसे देख हाथी गांव के आर्किटेक्ट ने भी प्रोजेक्ट में सबसे पहले वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की बात कही थी, जिसे अभी तक पूरा नहीं किया गया है। हाथी गांव एईएन रवीन्द्र छौकर के अनुसार सर्वेयरों ने पानी की कमी की बात कही है, इसके लिए जल्द ही विकल्प तलाशे जा रहे हैं।

हाथी गांव की जमीन के सर्वेयर पीएन भार्गव ने प्रोजेक्ट के लिहाज से पानी की कमी बताई थी। इसके बाद एडीएमए की ओर से पिछले दिनों खुदवाए गए ट्यूबवेल में पर्याप्त पानी नहीं आने से यह बात और पुख्ता हो गई।

हालांकि एडीएमए की ओर से अब पानी के लिए पीएचडी विभाग के सहयोग से पानी स्टोरेज के सिस्टम सहित नजदीक की पहाड़ी पर टैंक बनाए जाने का प्रपोजल है। लेकिन जानकारों के अनुसार जमीन में ही पानी नहीं होने से ऐसे प्रयास करना बेकार है।

मौजूदा हालात इससे बेहतर : वन्यजीवों के लिए कार्यरत संस्था ‘वल्र्ड’ के डायरेक्टर मनीष सक्सेना बताते हैं कि हाथी एक सामाजिक प्राणी है, जो समूह में रहना पसंद करते हैं। सभी हाथी मालिकों ने इसके लिए खुली जगहों में बेहतर इंतजाम भी कर रखे हैं। लेकिन हाथी गांव में इसे नजरअंदाज किया गया है।

एसोसिएशन ऑफ जू एंड एक्वेरियम नामक अंतरराष्ट्रीय संस्था की रिपोर्ट अनुसार पालतू हाथियों को इंडोर में 50 वर्गमीटर और खुले में 200 वर्ग मीटर जगह चाहिए। जबकि हाथी गांव में केवल 33 और 100 वर्ग मीटर जगह रखी गई है। वहीं अब तक साथ रहते आए अधिकतर हाथियों को अलग-अलग रखने से उनमें चिड़चिड़ापन और गुस्से की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।





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