जयपुर. प्रदेश में पिछले कुछ साल से शिक्षकों की बड़ी संख्या में नियुक्तियों के चलते सरकारी स्कूलों में नौकरी का क्रेज काफी बढ़ा है, खासकर महिलाओं में। अगले माह प्री-एमएड, बीएड, बीएसटीसी परीक्षाओं में करीब 66 हजार सीटों के लिए रिकार्ड साढ़े 8 लाख परीक्षार्थी भाग्य आजमाएंगे। इनमें करीब 60 फीसदी संख्या बेटियों की है।
प्री-एमएड, बीएड में तो पिछले साल की तुलना में करीब दुगुने छात्र-छात्राएं बैठेंगे। प्री-बीएसटी के 5 लाख 15 हजार से ज्यादा आवेदन-पत्र बिक चुके हैं। प्री-बीएड में पिछले साल के 1 लाख 88 हजार फॉर्म के मुकाबले इस बार रिकार्ड 3 लाख 12 हजार फॉर्म बिके हैं। महिलाओं में टीचर बनने की ललक पहले की तुलना में बढ़ी है।
अभी 35 फीसदी महिलाएं शिक्षक : राज्य में फिलहाल प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा में कुल 3,97,000 शिक्षक हैं। इनमें से 1,40,000 महिलाएं हैं। ग्रामीण इलाकों की बेटियां भी इस जॉब को सरकारी नौकरी में सर्वश्रेष्ठ ऑप्शन मानती हैं।
साइंस फैकल्टी वाले भी:
12वीं और स्नातक साइंस फैकल्टी से करने वाले कई छात्र-छात्राएं भी एसटीसी और बीएड करना चाहते हैं। उनका मानना है कि कम खर्चे में सरकारी नौकरी का यह बेहतर ऑप्शन है।
>> ‘‘महिला शिक्षा को लेकर हो रहे प्रयासों का परिणाम दिखने लगा है। प्री-एमएड परीक्षा में तो करीब 65 फीसदी महिला आवेदक हैं। राज्य के 75 प्रतिशत बीएड-एमएड कॉलेजों में महिला टीचर हैं। निजी शिक्षण संस्थाओं में भी महिला शिक्षकों की तादाद ज्यादा है।
मथुरेश्वर पारीक, कॉडिर्नेटर, प्री-एमएड परीक्षा
>> ‘‘हर किसी की अपनी पसंद है, लेकिन मुझे बच्चों को पढ़ाने में अजीब सा आनंद मिलता है। मैं इस जॉब को छोड़ दूसरी नौकरी नहीं करना चाहती।
आरती चितकारिया, टीचर
>> नौकरी के आश्वासनों का असर साफ तौर पर दिख रहा है। प्रीबीएड में 60 फीसदी आवेदन बेटियों के हैं।
एल.सी. भारतीय, महासचिव, राजस्थान गैर सरकारी महाविद्यालय परिषद
>> परिवार संभालने वाली महिला समाज की जिम्मेदारी भी अच्छे से निभा सकती है।
वासुदेव देवनानी,शिक्षा राज्यमंत्री
>> प्री-बीएड में छात्रों की तुलना में कहीं ज्यादा छात्राएं बैठेंगी। वे इस जॉब में बेहतर भविष्य तलाशती हैं।
आर.एल. माथुर, कॉर्डिनेटर, प्रीबीएड परीक्षा