जयपुर. राज्यपाल एस.के.सिंह ने पाकिस्तान से सटे सीमावर्ती क्षेत्र में करीब डेढ़ लाख बीघा जमीन नियम विरुद्ध बिकने का सच केंद्र सरकार को बता दिया है। केंद्र सरकार इस मामले की पहले ही जांच शुरू कर चुकी है।
राज्यपाल ने इसी महीने 4 से 7 अप्रैल तक सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर, बाड़मेर और जैसलमेर का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जमीनों की खरीद-फरोख्त की जानकारी ली थी। उन्होंने अधिकारियों से न केवल जमीन की रजिस्ट्री की प्रक्रिया जानी, बल्कि कुछ रजिस्ट्रियों और सब रजिस्ट्रार कार्यालयों के रिकॉर्ड का भी अवलोकन किया।
उल्लेखनीय है कि सीमावर्ती क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नियम विरुद्ध जमीनें बिकने का मामला सबसे पहले बाड़मेर-जैसलमेर के सांसद मानवेन्द्रसिंह ने उठाया था। राज्य सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। इस पर उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह को पत्र लिखा। इससे केंद्रीय जांच एजेंसियां हरकत में आईं। केंद्र ने भी इस मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी।
रजिस्ट्रियों में गड़बड़ियां : जैसलमेर-बाड़मेर जिलों में प्रतिबंधित क्षेत्र की जमीनों की रजिस्ट्री तक हो गई थी। अधिकांश रजिस्ट्रियों में खरीदार और विक्रेताओं के फोटो नहीं थे। किसी रजिस्ट्री में दस्तखत नहीं थे तो किसी में अंगूठे का निशान भी नहीं लिया गया था।
राज्यपाल ने रिपोर्ट में क्या कहा
राज्यपाल एस.के. सिंह ने कहा कि कोई भी राज्यपाल जब दिल्ली जाता है तो केंद्र के नुमाइंदों से विभिन्न मुद्दों पर बातचीत होती ही है। इनकी जानकारी मीडिया को नहीं दी जा सकती। लेकिन सूत्रों का कहना है कि राज्यपाल ने अपनी रिपोर्ट में बॉर्डर एरिया में जमीनें बिकने को गंभीर मामला बताया है।
बताया जाता है कि जमीनें बिकवाने में निजी कंपनी और सत्ता से जुड़े कुछ लोगों पर भी आशंका जताई गई है। यह भी कहा गया है कि आश्चर्यजनक रूप से प्रशासनिक मशीनरी ने रजिस्ट्री करते समय नियम-कानूनों का ध्यान नहीं रखा। इस मामले की गहनता से जांच होनी चाहिए।
करीब 25 सब रजिस्ट्रार आए शक के दायरे में
इस प्रकरण में करीब 25 सब रजिस्ट्रार शक के दायरे में आए थे। गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने विधानसभा में कहा था कि चार सब रजिस्ट्रारों को निलंबित कर दिया गया है, बाकी के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति सभी रजिस्ट्रियों की जांच कर रही है।
कांग्रेस ने की मांग
सीमा के पास नियम विरुद्ध जमीनें बिकने का मामला कांग्रेस ने विधानसभा में उठाया था। इसमें भाजपा नेता के पुत्र की भूमिका को संदिग्ध बताते हुए कांग्रेस ने सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी।