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चचेरे भाई ने दी थी हेमराज की सुपारी

उदयपुर. शहर से लगे कानपुर गांव में किसान हेमराज डांगी पर फायरिंग के मामले में प्रतापनगर पुलिस ने शनिवार को सुपारी देने वाले उसके चचेरे भाई गणोश डांगी को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही सुपारी लेने वाले के रूप में शातिर अपराधी मुकुटसिंह का नाम उजागर किया है। मुकुटसिंह अभी फरार है।

‘भास्कर’ ने अपने इन्वेस्टिगेशन में पहले ही यह उजागर कर दिया था कि इस मामले में सुपारी देने वाला हेमराज का ही कोई नजदीकी रिश्तेदार है और उसी ने जमीन विवाद के चलते एक शातिर बदमाश को सुपारी दी थी। उस शातिर ने यह काम शेरखान को सौंप दिया। पुलिस ने बताया कि हेमराज की हत्या के लिए उसके चचेरे भाई गणोश डांगी ने मुकुटसिंह को ढाई लाख रुपए में सुपारी दी थी।

मुकुटसिंह को इस काम के लिए बतौर पेशगी एक लाख 80 हजार रुपए भी दिए गए थे। शेष रकम का भुगतान काम हो जाने के बाद में किया जाना था। पुलिस ने गणोश डांगी को गिरफ्तार कर लिया, जबकि मुकुटसिंह और एक अन्य युवक राजू मीणा अभी फरार चल रहे हैं।

दुश्मनी की वजह
हेमराज कानपुर निवासी गणोश डांगी का चचेरा भाई है। हेमराज और गणोश के बीच लंबे समय से जमीन के बंटवारे को लेकर विवाद था। पुलिस पूछताछ में गणोश ने बताया कि जमीन को लेकर हेमराज ने गणोश और उसके पिता के साथ कई बार झगड़ा किया था। हेमराज एक-दो बार उनके पीछे तलवार लेकर भी दौड़ा था।

हेमराज जादू-टोना भी जानता है और उसने टोना-टोटका कर उसे खत्म करने की धमकी भी दी थी। इसके बाद गणोश ने हेमराज को ठिकाने लगाने के लिए मुकुटसिंह से ढाई लाख रुपए में सौदा तय किया था। गणोश डांगी व मुकुटसिंह की पहचान इस घटना से कुछ दिन पूर्व सब्जी खरीदते समय हुई थी, जहां गणोश ने हेमराज को ठिकाने लगाने की बात की थी।

मुकुटसिंह ने शेरखान को काम सौंपा
मुकुटसिंह ने बांसवाड़ा और हाल हिरणमगरी निवासी शेरखान से हेमराज को मारने का सौदा 50 हजार रुपए में तय किया। मुकुटसिंह ने इस काम के लिए बतौर पेशगी शेरखान को पांच हजार रुपए भी दिए। शेरखान एक मामले में लंबे समय से जेल में बंद था और एक वर्ष पहले ही वह जेल से छूटा था। जेल से छूटने के बाद वह अपनी गैंग बना रहा था।

शेरखान ने इस काम के लिए पानेरियों की मादड़ी निवासी नरेंद्र पानेरी और मुकुटसिंह द्वारा भेजे गए राजू मीणा को हेमराज का काम तमाम करने के लिए भेजा। इन लोगों ने दो-तीन दिन की रेकी के बाद आठ अप्रैल की शाम को जब हेमराज उसकी पत्नी के साथ खेत पर काम कर रहा था, तब उस पर गोली चलाई गई। गोली हेमराज को कंधे में लगी और वह बाल-बाल वह बच गया। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में शेरखान और नरेंद्र को गिरफ्तार किया था। कड़ी पूछताछ में दोनों ने यह राज खोला।

गणोश आया पकड़ में : पुलिस ने शनिवार को गणोश डांगी को भी गिरफ्तार कर लिया।

तलाश : पुलिस को अब शातिर अपराधी मुकुटसिंह व हेमराज पर फायर करने वाले राजू मीणा की तलाश है।

कहां हो सकता है मुकुटसिंह : मुकुटसिंह बालागढ़ (पाली) का रहने वाला है। गिरधारी भंडारी हत्याकांड में उसका नाम आने के बाद वह बाली व भीम के जंगलों में छिपा रहा। करीब सात साल बाद इस मामले पुलिस मुकुटसिंह को गिरफ्तार कर पाई थी।

मुकुटसिंह का अपराधनामा
हत्या : शातिर अपराधी मुकुटसिंह पुत्र वीरमसिंह मूलत: निवासी रायराखुर्द (पाली) हाल सेक्टर 5 पर आठ वर्ष पूर्व 17 जुलाई 2000 को होटल व्यवसायी गिरधारी भंडारी की गोली मार कर हत्या करने का आरोप लगा था। गिरफ्तारी के बाद साक्ष्य के अभाव में उसे अदालत ने 26 अक्टूबर 07 को अदालत से बरी कर दिया।

अदालत से भागने का प्रयास : मुकुटसिंह ने 7 नवंबर 06 को एक मामले में जिला सेशन न्यायालय परिसर में पेशी पर लाने के दौरान चालानी गार्ड के साथ धक्का-मुक्की कर भागने का असफल प्रयास किया था।

हेंडीक्राफ्ट व्यवसायी पर फायर : आठ वर्ष पूर्व ही मुकुटसिंह पर सहेली मार्ग के एक हेंडीक्राफ्ट व्यवसायी पर फायरिंग कर जानलेवा हमले का भी आरोप लगा था।

कोर्ट चौराहे पर जान लेवा हमला : मुकुटसिंह ने गाड़ी को साइड देने के विवाद पर 25 अगस्त 07 को कोर्ट चौराहे पर दिनदहाड़े कार से उतर कर एक युवक पर चाकू से वार किए थे। इस दौरान डिप्टी चन्द्रशील ठाकुर व उनकी टीम ने उसे घटनास्थल से ही धरदबोचा तथा उसके कब्जे से जहरीले डॉट, नशीला स्प्रे और चाकू आदि बरामद हुआ था।

सुपारी का सफर
सुपारी दी : गणोश डांगी ने अपने चचेरे भाई हेमराज को मारने ने लिए ढाई लाख रुपए की सुपारी दी। सुपारी ली : मुकुटसिंह ने ढाई लाख रुपए में हेमराज को मारने का सौदा किया। मुकुटसिंह ने किया : मुकुटसिंह ने हेमराज डांगी को मारने के लिए शेरखान से पचास हजार रुपए में सौदा तय किया। शेरखान ने किया : आठ अप्रैल की शाम को अपनी गेंग के नरेंद्र पानेरी और मुकुटसिंह के भेजे आदमी राजू मीणा को हेमराज का काम तमाम करने के लिए भेजा। लेकिन निशाना चूक गया और गोली हेमराज के कंधे पर लगी। पुलिस ने किया : 21 अप्रैल को पुलिस ने शेरखान और उसके साथी नरेन्द्र पानेरी को गिरफ्तार कर लिया। उनसे पूछताछ में गणोश डांगी और मुकुटसिंह का नाम सामने आया।





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