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राष्ट्रीय कानून ही सर्वोपरि: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय कानून को सर्वोपरि बताते हुए कहा है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनों में विरोधाभास होने पर राष्ट्रीय कानून को ही महत्व दिया जाना चाहिए।

जस्टिस अशोक भान और दलवीर भंडारी की बेंच ने कई अंतरराष्ट्रीय तेल कंपनियों की याचिकाओं को खारिज करते हुए यह व्यवस्था दी है। उन्होंने कहा ‘दोनों कानूनों में संघर्ष न होने की स्थिति में गणतंत्र की संप्रभुता व अखंडता और कानून बनाने में स्थापित विधायिका की सर्वोच्चता पर बाहरी नियम सिर्फ वहीं तक लागू होते हैं, जहां तक गठित कानूनों में उन्हें वैधता दी गई हो।

तेल कंपनियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें ड्रिलिंग कांट्रेक्टरों द्वारा ऑइल रिग की आपूर्ति के लिए आयातित सामान पर कस्टम ड्यूटी की वसूली को उचित ठहराया गया था। कोर्ट के मुताबिक स्पेयर पार्ट्स व अन्य उपकरणों को ऑइल रिग में उपयोग के लिए स्टोर किया जाना था।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में अंतरराष्ट्रीय कानून यूएनसीएलओएएस 1982 के अनुच्छेद 127 का उल्लेख किया और कहा कि इसके तहत दूसरे देश जा रहे जहाज के माल पर ड्यूटी न लेने का प्रावधान है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इसका दूसरा मतलब यह भी है कि अन्य किसी स्थान पर न ले जाए जा रहे सामान पर ड्यूटी वसूलने पर कोई रोक नहीं है।





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