मुंबई.हमें जो एलपीजी सिलेंडर 300 रुपए में मिल रहा है अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी के चलते उसकी कीमत 620 रुपए होनी चाहिए। यही हाल पेट्रोल-डीजल का है। अगर सरकार और तेल कंपनियां तेल की कीमतों पर नियंत्रण न रखें तो देश में इन पेट्रो उत्पादों की कीमतें और भी बढ़ सकती हैं। पेट्रो उत्पाद दरों में उछाल का खमियाजा सरकारी नवरत्न कंपनियां भुगत रही हैं।
इंडियन ऑयल, भारत पैट्रोलियम व हिंदुस्तान पैट्रोलियम ने भारी नुकसान के बावजूद कीमतों में तेजी थाम रखी है।
कितनी है अंडर रिकवरी
2008-09में इन कंपनियों को होने वाली अंडर रिकवरी (वास्तविक मूल्य व बिक्री मूल्य में अंतर) १,60,000करोड़ आंकी गई है। यह राशि पिछले वर्ष की तुलना में दोगुनी से भी अधिक है। अंतरराष्ट्रीय कीमतें: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्च तेल ११६ डॉलर प्रति बैरल पर है। विश्लेषकों का मानना है कि तीन-चार महीनों में यह १५क् डालर प्रति बैरल तक पहुंच जाएगा।
क्या है सरकार का स्वार्थ: विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने दे तो कंपनियों की दिक्कतें कम हों। चुनावी माहौल में व राजनीतिक मकसदों से इनमें बढ़ोतरी नहीं होने दी जा रही। तेल कंपनियों को सरकार ने ऑयल बांड जारी कर कुछ हद तक मदद तो मुहैया कराई है परंतु यह काफी नहीं।
वास्तविक कीमत
सरकारी नियंत्रण हट जाए तो देश में पेट्रोल उत्पादों की कीमत 65 रु. प्रति लीटर ऐसी होंगी। एलपीजी-620 रु. प्रति सिलेंडर
पेट्रोल-65 रु. प्रति लीटर
डीजल-50 रु . प्रति लीटर
कैरोसीन-30 रु. प्रति लीटर
‘मेरे आकलन के अनुसार इस वर्ष हमारी कंपनी की उधारी २,क्क्क् करोड़ रुपए प्रतिमाह और बढ़ सकती है। हमें सहायता के तौर पर कम से कम ५क्,क्क्क् करोड़ की आवश्यकता है।’
एस वी नरसिम्हन निदेशक वित्त, इंडियन ऑयल