अमृतसर/जालंधरफिल्मों में फ्लाप रही पूर्व विश्व सुंदरी युक्तामुखी दूसरी पारी खेलने के लिए तैयार हैं। वह मानती हैं कि पहले उनके सीखने का दौर था और अब उसी अनुभव को प्लेटफार्म बनाएंगी। तब मैं शर्मिली लड़की थी अब औरत हूं। रेस कोर्स रोड पर बीम्स हॉस्पिटल के उद्घाटन समारोह में पहुंची युक्ता ने अब तक की अपनी लाइफ को स्ट्रगलफुल बताया और कहा कि उन्होंने कभी हारना नहीं सीखा है। इसी मूलमंत्र को लेकर वह भविष्य की सीढ़ियां चढ़ेंगी और सफल भी होंगी।
1999 में विश्व सुंदरी का खिताब जीतने वाली युक्तामुखी ने कहा कि उनकी जिंदगी का दस वर्षो का यह सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा। इस दौरान उन्होंने जिंदगी और सोसायटी की हकीकत के साथ-साथ कड़वे और मीठे अनुभव झेले। दस साल पहले वह शर्मिली-सी लड़की हुआ करती थीं, लेकि न अब महिला बन चुकी हैं और हर चैलेंज को फेस करने की हिम्मत रखती हैं।
‘मेम साहिब’ से उम्मीदें
जून तक रिलीज होने वाली अपनी प्रमुख फिल्म ‘मेम साहिब’ को लेकर युक्ता खासी उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि यह फिल्म 1984 के दंगों पर आधारित है। इसमें दंगा प्रभावित एक लड़की को कोठे पर बेच दिया जाता है। उन्होंने उस लड़की का किरदार निभाया है। उन्होंने बताया कि कहानी पंजाब से संबंधित थी, इसलिए यह उनके लिए खासा चैलेंजिंग रहा। पूर्व विश्व सुंदरी ने बताया कि वह कई अन्य फिल्मों में भी काम कर रही हैं। अब वह पूरी तरह से फिल्मों के लिए कटिबद्ध हैं और यह पारी गंभीरता के साथ खेलेंगी। उनका मानना है कि सूझ और तनदेही के साथ किया गया काम अवश्य सफलता दिलाता है।
योग पर टिका है करियर
युक्तामुखी कहती हैं कि योग उनके कैरियर का आधार है। उनका बचपन से इस तरफ रुझान रहा। विश्व सुंदरी बनने में इसने अहम भूमिका अदा की है। हठ योग में विशेष दिलचस्पी रखने वाली युक्ता ने बताया कि वह सारी दुनिया घूमी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने यह अनुभव किया कि हमारी संस्कृति और सभ्यता सर्वश्रेष्ठ है। बस जरूरत है इसे जमाने के मुताबिक स्वीकारने और ढालने की।