जालंधरबच्चों की उम्र के साथ उनकी पॉकेट मनी भी बढ़नी शुरू हो जाती है। 5 से 25 साल तक के सफर में पॉकेट मनी तेजी से बढ़ती है। बच्चों के खर्च भी बड़ो से कम नहीं हैं। बच्चे इन डोर गेम्स के साथ ऑउट डोर गेम्स पर भी पॉकेट मनी इंवैस्ट कर रहे हैं। दैनिक भास्कर में 19 अप्रैल के फ्रंट पेज पर छपी ‘एसोचैम’ की सर्वे रिपोर्ट बच्चों की पॉकेट मनी पर ही आधारित है। इसमें हुए खुलासों से सिटीजन्स इत्तेफाक रखते हैं। शनिवार को सिटी पेरैंट्स ने इस पर रखी बेबाक बात
मुझे हर महीने 1800 रुपए पॉकेट मनी मिलती है, जिसमें से मैं सारे खर्च कर 500 से 700 तक की सेविंग कर लेता हूं। इसमें से मैं क्रिकेट अकादमी की फीस भी निकालता हूं। इसके अलावा अगर कभी दोस्तों के साथ पार्टी का प्रोग्राम भी बने तो वो भी मैं अपनी पॉकेट मनी में से ही निकालता हूं। मैं अपनी हर महीने की सेविंग को महीने की आखरी तारीख पर सेविंग बॉक्स में डाल देता हूं। मेरा मानना है कि खर्च पर कंट्रोल जरूरी है।
- अंशल शर्मा, स्टूडैंट।
मेरे ख्याल से बच्चों को पॉकेट मनी उनकी एज और सोसाइटी देखकर ही देनी चाहिए। कहीं ऐसा न हो कि बच्चों की सोसाइटी खराब हो और वे ज्यादा पॉकेट मनी से गलत रास्ते पर चलना शुरू कर दें। इसीलिए बच्चों की पॉकेट मनी उसके सर्किल और प्रायोरिटी के हिसाब से ही तय करनी चाहिए। मैं तो बच्चों को शुरू से सेविंग की आदत डाल चुका हूं।
- संजीव कालिया
बच्चों की पॉकेट मनी उनकी जरूरतों और महंगाई को ध्यान में रखकर ही तय करनी चाहिए, क्योंकि जिस तरह बच्चों की एज बढ़ती है। उसी तरह उनकी जरूरतें भी बढ़नी शुरू हो जाती हैं। इसीलिए उनकी जरूरतों के हिसाब से ही पॉकेट मनी को बढ़ाना चाहिए। साथ ही शुरू से ही उन्हें सेविंग की आदत डालनी चाहिए।
- उपमा।
5 से 10 साल की उम्र के बच्चो का खर्च पॉकेट मनी : 1500रू. चॉकलेट पर : 15 प्रतिशत आउट डोर गेम्स : 20 प्रतिशत विकएंड आउटिंग : 25 प्रतिशत स्टेशनरी : 10 प्रतिशत ड्रैसेस : 30 प्रतिशत
11 से 18 साल
पॉकेट मनी : 2500 ऑउट डोर गेम्स : 15 प्रतिशत फास्ट फूड : 20 प्रतिशत विकएंड : 20 प्रतिशत पैट्रोल : 20 प्रतिशत डैसिस : 25 प्रतिशत
19 से 25 साल की उम्र
पॉकेट मनी : 3500 पार्टी : 15 प्रतिशत आउटिंग : 10 प्रतिशत मोबाइल : 15 प्रतिशत पैट्रोल : 20 प्रतिशत एन्जॉयमैंट : 20 प्रतिशत ड्रैसेस : 20 प्रतिशत