पानीपतप्रदेश में बिजली संकट और गहरा सकता है, क्योंकि ताप बिजलीघरों में कोयले की भारी किल्लत है। यह खबर सूबे के लिए खाज में खुजली के समान है। प्रदेश में पहले से ही बिजली संकट चल रहा है। यदि एक-दो दिन में कोयले की आपूर्ति नहीं सुधरी तो कुछ बिजली उत्पादन इकाइयों को कोयले की किल्लत के कारण बंद करना पड़ सकता है। प्रदेश का पानीपत का थर्मल प्लांट खस्ता हाल स्थिति में है। सूत्रों के मुताबिक 1360 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता वाले इस प्लांट में एक हफ्ते का कोयला स्टॉक ही है, जबकि नियमानुसार 25 दिन का स्टॉक जरूरी है।
आलम यह है कि प्लांट की 110 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाली एक यूनिट पिछले पांच माह से बंद पड़ी है। वहीं इतनी ही क्षमता वाली यूनिट चार करीब 15 दिनों से ठप है। प्लांट में पिछले कुछ दिनों से छह रैक के स्थान पर मात्र तीन रैक कोयला ही पहुंच रहा है। फरीदाबाद ताप बिजली घर में हालांकि कोयले का स्टॉक है लेकिन यहां तीन में से दो ही यूनिटें चल रही हैं। इधर, ट्रायल पर चल रहे यमुनानगर के दीनबंधु सर छोटूराम थर्मल पॉवर प्लांट की 300 मेगावाट की पहली इकाई को रविवार से तीन सप्ताह के लिए बंद कर दिया गया। यह यूनिट 31 मार्च 2006 से पूरे लोड पर चल रही थी।
कुछ पॉवर स्टेशनों में कोयले की किल्लत है। थर्मल में अभी 8-10 दिन का रिजर्व स्टॉक है। जहां ज्यादा कमी है, वहां पर कोयला पहले भेजने के कारण पानीपत में स्टॉक कम हुआ है। साढ़े पांच के स्थान पर औसत तीन रैक आ रहे हैं। प्रयास जारी है। एक-दो दिन में स्थिति सुधर सकती है।
-देवेंद्र सिंह अहलावात, चीफ इंजीनियर (द्वितीय) पानीपत थर्मल पावर स्टेशन