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गौर के खिलाफ मामले से सरकार पसोपेश में

भोपाल. वाणिज्यिक कर मंत्री बाबूलाल गौर के लगभग एक साल पहले राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो द्वारा गुपचुप दर्ज प्राथमिकी सरकार और ब्यूरो के आला अफसरों की परेशानी का सबब बन गई हैं। शीर्ष प्रशासनिक स्तर से बार-बार कहने के बावजूद पिछले एक साल से न तो प्राथमिकी का पटाक्षेप हो है और न ही जांच आगे बढ़ पा रही है।

दरअसल मामला देशी शराब की बाटलिंग नीति बदलने का मामला ठंडे बस्ते में डालने का हैं। ब्यूरो के उच्च पदस्थ सूत्रों ने श्री गौर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने की पुष्टि की है। उन्होंने मंजूर किया कि इस प्रकरण की जांच चल रही है।

सूत्रों के पिछले साल आबकारी नीति तैयार करते वक्त वाणिज्यिक कर विभाग के उच्च अधिकारियों ने इस बात पर विचार किया था कि देशी शराब टैंकर से वेयर हाउस लाने और वहां पर इसकी बाटलिंग करने में मिलावट की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए इस व्यवस्था को बदलकर देशी शराब बनाने के साथ ही, वहीं पर बाटलिंग की जाए।

इस विचार की चंद दिनों में ही जब हवा निकल गई तो रचना नगर भोपाल निवासी आरपी पांडे ने देशी शराब की पैकिंग आटोमैटिक बाटलिंग प्लांट में भरने के बजाय इसकी सेमी बाटलिंग जारी रखने को भ्रष्टाचार बताते हुए इस नीति को बरकरार रखने में भारी लेनदेन का आरोप लगाया था। इसकी लिखित शिकायत उन्होंने राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में इसकी शिकायत की। ब्यूरो के तत्कालीन महानिदेशक ओपी गर्ग के कार्यकाल में ही इस शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज हो गई।

इसके बाद ब्यूरो के एक इंस्पेक्टर ने अपने हस्ताक्षर से वाणिज्यिक कर विभाग को एक पत्र भेजकर आबकारी नीति से संबंधित दस्तावेज मांगे। जिसे देने से वाणिज्यिक कर विभाग के अफसरों ने साफ इंकार कर दिया। जिस दिन प्रस्तावित आबकारी नीति पर मंत्रिमंडल की मुहर लगना थी, उसी दिन ब्यूरो का एक इंस्पेक्टर नीति के दस्तावेज लेने मंत्रालय जा धमका।

जब यह मामला मुख्य सचिव राकेश साहनी के पास पहुंचा तो उन्होंने ब्यूरो के रवैये पर आपत्ति की। उन्होंने ब्यूरो के तत्कालीन महानिदेशक श्री गर्ग को बुलाकर बात की। इसके बाद भी जब इस मामले में खात्मा नहीं लग पाया। जब ब्यूरो में महानिदेशक पद पर दिसंबर 07 में एसके राउत आए तो उन्हें भी बुलाकर मुख्य सचिव ने चर्चा की। मगर मजेदार बात तो यह है कि इस हाई प्रोफाइल प्रकरण में ब्यूरो न तो खात्मा लगा पा रहा है और न ही जांच आगे बढ़ा रहा है।

ब्यूरो भी लोकायुक्त के नक्शे कदम पर
प्राय:ब्यूरो उन्हंी मामलों की जांच करता है, जो या तो सरकार उसे सौंपे या फिर अदालत के निर्देश पर उसे दिए जाए, लेकिन ब्यूरो का काम सरकारी और अर्ध सरकारी महकमों में होने वाले आर्थिक अपराध की जांच कर उनके चालान पेश करना है, लेकिन उसकी वक्रदृष्टि भी व्यक्तिगत मामलों में ज्यादा पड़ रही है,जबकि मंत्रालय के कैशबुक कांड समेत तीन महत्वपूर्ण मामले जो उसे सौंपे गए है,उनकी जांच मंथर गति से चल रही है।

मुझे जानकारी नहीं
मेरे खिलाफ ईओडब्ल्यू में कोई प्राथमिकी दर्ज हुई है,इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। मुझे तो आपसे ही मालूम चल रहा है कि मेरे खिलाफ कोई जांच चल रही है।
बाबूलाल गौर मंत्री वाणिज्यिककर





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