भोपाल.
प्रदेश में गहराए बिजली संकट के कम होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। एनटीपीसी की दो इकाइयां बंद होने से बिजली की उपलब्धता में और कमी हुई है। इतना ही नहीं पंजाब, हरियाणा और दिल्ली बिजली संकट बढ़ाने में लगे हैं।
दो दिन पहले बिरसिंहपुर में एक साथ चार उत्पादन इकाइयां ठप होने की वजह यही राज्य थे। वे उत्तरी ग्रिड से अपने कोटे से ज्यादा बिजली ले रहे हैं इससे ग्रिड की फ्रीक्वेंसी घट गई और खामियाजा मप्र को भुगतना पड़ रहा है।
राज्य बिजली बोर्ड के सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को बिरसिंहपुर की 210-210 मेगावाट क्षमता की चार इकाइयां तीन घंटे ठप रहने की वजह उत्तरी ग्रिड की फ्रीक्वेंसी कम होना थी। पश्चिमी और उत्तरी ग्रिड को मिलाकर एक ग्रिड में जोड़ा जा चुका है।
फ्रीक्वेंसी कम होने से पश्चिमी ग्रिड से जुड़ा मप्र का बिरसिंहपुर संयंत्र ठप हो गया था। फ्रीक्वेंसी कम होने की वजह दिल्ली, पंजाब और हरियाणा द्वारा अपने हिस्से से ज्यादा बिजली लेना थी।
इधर शुक्रवार से एनटीपीसी की 500-500 मेगावाट क्षमता की विंध्याचल और कोरबा इकाईयों के ठप होने से भी मप्र में संकट और गहराया है। इन दोनों यूनिट से मप्र को 100-100 मेगावाट बिजली मिलती है।
विशेषज्ञ और उपकरण मंगाए
इधर संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंहपुर में गुरुवार से ठप 500 मेगावाट की इकाई को दुरस्त करने चेन्नई से उपकरण और विशेषज्ञ बुलवाए गए हैं। इस यूनिट में इनकमर ब्रेकर खराब हो गया था।
प्रदेश में बिजली की उपलब्धता- 3800 मेगावाट
बिजली की जरूरत- 6000 मेगावाट
कमी-2200 मेगावाट
ये हैं हालात
सेंट्रल सेक्टर से करीब 300 मेगावाट बिजली ओवर-ड्रा करने के बावजूद प्रदेश में करीब 2200 मेगावाट बिजली की कमी है। छोटे शहरों और गांवों में 10 से 18 घंटे तक बिजली गुल हो रही है। रविवार होने के कारण उद्योग-धंधे बंद होने से चार सौ मेगावाट बिजली अतिरिक्त मिली।