इंदौर.
लोक परिवहन की पहचान बनी इंदौर की सिटी बसें फिजा में घुले जहर (कार्बन डाईऑक्साइड) को कम करके कार्बन क्रेडिट के रूप में सरकारी खजाना भी भरेंगी। इसका सर्वे अंतिम चरण में है। जानकारों को क्रेडिट के रूप में सालाना सात करोड़ से ज्यादा मिलने की उम्मीद है।
अर्से से लोक परिवहन की जरूरतों को देखते हुए 2005 में शहर की सड़कों पर अत्याधुनिक बसें चलाने की योजना बनी थी। जनवरी २क्क्६ से सड़कों पर दौड़ी सिटी बसों ने धुआं उड़ाने वाली नगर सेवाओं की छुट्टी कर दी। बसों का असर पर्यावरण पर पड़ा और हवा में घुली जहरीली गैसों की मात्रा कम हुई जिसे देखते हुए जिला प्रशासन ने कार्बन क्रेडिट लेने का मन बनाया।
प्रक्रिया जटिल होने के कारण इमर्जेट वेंचर्स इंडिया प्रा.लि. दिल्ली से अगस्त 2007 में अनुबंध किया। अनुबंध के तहत बसों और उनके कारण पर्यावरण में आए सुधार के सर्वे, मॉनिटरिंग और प्रोजेक्ट तैयार करने का जिम्मा कंपनी को सौंपा गया। आठ महीनों से कंपनी द्वारा जारी सर्वे अंतिम चरण में है।
आईसीटीएसएल के सीईओ चंद्रमौलि शुक्ल ने बताया डीजल से चल रही बसें जल्द ही सीएनजी से चलेंगी। इससे भी प्रदूषण में कमी और कार्बन क्रेडिट में बढ़ोतरी होगी। आईसीटीएसएल के तकनीकी सलाहकार सतीशचंद्र गर्ग ने बताया दस वर्षीय इस अनुबंध के तहत क्रेडिट दिलाने की जवाबदारी कंपनी की है।
इसके बदले में हम पहले चार साल कुल राशि का छह प्रतिशत कंपनी को देंगे और बाकी छह साल 4.5 प्रतिशत। सर्वे रिपोर्ट मई के दूसरे-तीसरे सप्ताह तक पूरी हो जाएगी।
सड़कें भी काम की
सर्वे में बसों के साथ निर्माणाधीन-प्रस्तावित बीआरटीएस कॉरिडोर के साथ उन फीडर सड़कों को भी शामिल किया है जिनसे शहर का यातायात सुगम हुआ। हॉस्विन इनसिनिरेटर प्रा.लि. के असद वारसी और अनिल जैन ने बताया दस वर्षो में सड़कों की दशा बदली है जिसके कारण वाहन चालकों को बार-बार ब्रेक लगाने और गियर बदलने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे न सिर्फ प्रदूषण सुधरा बल्कि बड़े पैमाने पर ईंधन की बचत भी हुई। बतौर क्रेडिट सिर्फ बसों और बीआरटीएस से सालाना 7.5 करोड़ मिलेंगे।
छह सौ करोड़ से ज्यादा मिल सकते हैं
जानकारों के अनुसार नालों की सफाई, माडर्न स्लॉटर हाउस, झुग्गी उन्मूलन, खान नदी की सफाई, कचरा प्रबंधन, उद्यान निर्माण और पौधारोपण से पर्यावरण में सुधार आएगा और बतौर कार्बन क्रेेडिट इंदौर को सालाना 60 करोड़ से ज्यादा मिलेंगे, यानी दस वर्षो में 600 करोड़ जो केंद्र या राज्य से मिलने वाले अनुदान से कम नहीं होगा।
बसों के कारण घटा प्रदूषण
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड वैज्ञानिक दिलीप वाघेला के अनुसार सिटी बस से पर्यावरण में काफी सुधार है। आंकड़ों के लिहाज से बात करें तो 2005-07 के बीच विजयनगर क्षेत्र में धूल कणों की मात्रा 169 से 155, श्वसन योग्य धूल कण 106 से 92, सल्फर डायऑक्साइड 6 से 5 रह गई। पोलोग्राउंड पर धूल कण 277 से 226, श्वसन योग्य धूल कण 158 से 148, सल्फर डायऑक्साइड 11 से 10 रही।