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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. प्रदेश विश्व हिंदू परिषद के इस आयोजन में बड़ी संख्या में उपस्थित बजरंगियों से श्री तोगड़िया ने पूछा कि जब हिंदू अहिंसक हैं, तो फिर उन्हें त्रिशूल दीक्षा की जरुरत क्यों? उसका जवाब भी उन्होंने ये कहकर दिया कि हिंदू धर्मयोद्धाओं और वीर सेनाओं का धर्म है। धर्मद्रोहियों के संहारकों का धर्म है। यह केवल शांतिवार्ता या समझौता करनेवाला धर्म नहीं है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की कोई भी तस्वीर बिना त्रिशूल के नहीं मिलती।
इसी तरह मां दुर्गा की भी तस्वीर, चाहे वो चतुभरुज हो, अष्टभुज हो या 18 भुजाओं वाली, त्रिशूल और तलवार के बिना पूरी नहीं होती। अगर हिंदू अहिंसक हैं, तो उनके ये भगवान कहां से आए? श्री तोगड़िया ने कहा कि हिंदू धर्म में देवी भागवत, श्रीमद् भागवत, शिवपुराण, स्कंध पुराण सहित 18 पुराण हैं। इसके अलावा रामायण, महाभारत जैसे गं्रथ हैं, जिनके हर पन्ने पर राक्षसों और असुरों से युद्ध का वर्णन है।
उन्होंने कहा कि हिंदूधर्म धर्मद्रोहियों से शांतिवार्ता नहीं करता, समझौता नहीं करता, केवल युद्ध करता है। त्रिशूल दीक्षा उसी धर्मयुद्ध की तैयारी है। उन्होंने कहा कि देश में बड़े पैमाने पर जारी धर्र्मातरण, गोहत्या और आतंकवाद के खिलाफ यह दीक्षा अपरिहार्य है। इसी तरह रामसेतु को बचाने के लिए भी इसकी आवश्यकता है। इससे गांव-गांव में फैल रहे धर्मद्रोहियों के खिलाफ युद्ध किया जा सकेगा।
दीक्षा हर संभाग में : विश्व हिंदू परिषद ने कार्यक्रम में वर्ष 2008 के कार्यक्रमों की घोषणा भी की। जिसमें सितंबर से राज्य में तीन बड़े त्रिशूल दीक्षा समारोह संभागस्तरीय होंगे। उसके बाद विभाग, जिला स्तरीय आयोजन भी होंगे। इस साल एक लाख लोगों को बजरंग दल का सदस्य बनाकर उन्हें त्रिशुल दीक्षा देने की योजना है।
रामसेतु विरोधी
उन्होंने कहा कि रामसेतु के तीन विरोधी हैं। पहले हैं कम्युनिस्ट पार्टी के सीताराम येचुरी। जब राम-सीता ही नहीं थे, तो इनका नाम सीताराम कैसे पड़ा। दूसरे विरोधी हैं तमिलनाडू के मुख्यमंत्री करुणानिधि। करुणानिधि अर्थात दया के सागर विष्णु, जब राम-सीता ही नहीं थे तो विष्णु कैसे हो सकते हैं। तीसरे विरोधी प्रधानमंत्री मनमोहन यानी कृष्ण। राम-सीता, विष्णु के बिना भगवान कृष्ण की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
जब भगवान राम थे ही नहीं, तो महात्मा गांधी ने अंतिम समय में ‘हे राम’ क्यों कहा। आज भी उनकी समाधि पर ‘हे राम’ लिखा हुआ है। जिसे मिटाकर कांग्रेसी अपने पुरखों के पापों को धो सकते हैं। श्री तोगड़िया से पहले बजरंगियों को शदाणी दरबार के संत युधिष्ठिर महाराज, विहिप प्रदेशाध्यक्ष रमेश मोदी, बजरंग दल के क्षेत्रीय संयोजक राजेश पांडे, प्रदेश संयोजक मनीष दुबे ने संबोधित किया। मंच संचालन भुवनेश्वर साहू ने किया।
सुप्रीम कोर्ट में शपथपत्र
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने दो कारणों से शपथपत्र देकर राम के अस्तित्व को नकारा है। पहली वजह, जब राम ही नहीं थे तो उनका जन्मस्थल अयोध्या कैसा? जब राम ही नहीं थे, तो सीता भी नहीं थीं। जब सीता ही नहीं थीं तो उनका हरण कैसा।
जब सीता का हरण हुआ ही नहीं, तो राम की सेना भी लंका नहीं गई। इस तरह रामेश्वरम् से लंका के बीच रामसेतु बना ही नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार इसी आधार पर रामसेतु को निर्विघ्न तोड़ा जा सके। देश के लाखों बजरंगी ऐसा नहीं होने देंगे।