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असफलता का डर निकाल फेंको

लीडरशिप मंत्र. मैं बचपन में अपने दादा-दादी के साथ शतरंज खेला करता था और तकरीबन हर बाजी मैं उनसे हार जाता। जब कभी मैं परेशानी में होता तो उनसे कहता कि उन्होंने यह बाजी जीत ली है और दूसरी बाजी शुरू की जाए अथवा मैं अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने निकल जाता। मुझे लगता है कि मेरे साथ-साथ मेरी यह प्रवृत्ति भी बढ़ती गई। मैंने हमेशा हार से नफरत की और इससे बचने के लिए किसी खोल में चला गया।

समय गुजरने के साथ-साथ मैं जोखिम लेने से घबराने लगा, जिसकी मुख्य वजह होती पहले से मेरे दिमाग में घर कर चुका असफलता का डर और अस्वीकृति की भावना। इस प्रवृत्ति को बदलने की बजाय मैं समस्याओं से भागने लगा, मानो इनसे मेरा कोई वास्ता नहीं है। मेरे गुरुजनों ने मुझे इस प्रवृत्ति से छुटकारा दिलाते हुए मुश्किलों का डटकर सामना करना सिखाया।

हमेशा याद रखें, संकट की घड़ी में दूसरों की आप पर कड़ी निगाह होती है, न कि तब जबकि सब कुछ बेहतर चल रहा हो। मुश्किल में होने पर हम अपने खोल में छिप जाना चाहते हैं, बिना इसको महसूस किए कि हम क्या कर रहे हैं? जब हम किसी संकटपूर्ण परिस्थिति से गुजरते हैं, हम किंकर्तव्यविमूढ़ हो जाते हैं और सोचते हैं कि यह मेरे साथ क्यों हुआ? अब मैं क्या करूंगा? आदि-आदि।

हमेशा याद रखें:-
1- प्रतिकूल परिस्थितियों में खुद को शांत बनाए रखें।
2- दोषारोपण से बचें।
3- यही समय होता है जब आप पूर्वाग्रहों से ग्रसित हो सकते हैं, लेकिन ऐसे में अपनी टीम के साथ संवाद बनाए रखें।
4- उत्साही बनें, मुश्किलों को अपने और अपनी टीम पर हावी न होने दें।
5- निर्भीक बनें और जोखिम उठाने से न डरें।

-लेखक नेतृत्व प्रशिक्षण संस्था लीडकैप के संस्थापक हैं।





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