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खेल भावना को तमाचा

सम्पादकीय. क्रिकेट के ट्वेंटी-20 ओवर के इस नए अवतार की एक खास बात है कि यह मीडिया, खासतौर पर टेलीविजन की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। वह बात अलग है कि दर्शकों के लिए तीन घंटे में खत्म हो जाने वाले खेल के रोमांच की बात भी कुछ और है। इसीलिए इस खेल में होने वाली हर गतिविधि, चाहे वह चौके-छक्के हों या खिलाड़ियों की इशारेबाजी या आपस में नोकझोंक, सब कुछ कैमरों की नजर में रहता है।

इसी करीबी नजर का नतीजा है कि भारतीय क्रिकेट टीम के हरभजन सिंह, जो इंडियन प्रीमियर लीग की मुंबई क्रिकेट टीम के लिए निलंबन से पहले कप्तान रहे, आज एक ऐसी मुसीबत में हैं जिसके बारे में उन्होंने शायद सोचा भी न होगा। यह वही हरभजन सिंह हैं जो हालिया ऑस्ट्रेलिया के दौरे में नस्लवादी टिप्पणी के आरोप का शिकार हुए थे और उनके द्वारा की गई कथित टिप्पणी के चलते पूरी टीम के ऑस्ट्रेलिया दौर पर संकट आ गया था।

अजीब इत्तेफाक है कि उस घटना में पूरा देश हरभजन के साथ सहानुभूति रखता दिखाई दे रहा था। उनकी मासूम सी शक्ल देख सबको लगता कि यह पंजाबी पुत्तर ऐसा कर ही नहीं सकता। आज उसी मासूमियत के पीछे एक ऐसे शख्स का चेहरा दिख रहा है, जो अपने क्रोध पर नियंत्रण नहीं रख सकता। कोई शक नहीं कि इस घटना के बाद कुछ लोग यह भी सोचने पर मजबूर हो जाएं कि कहीं ऑस्ट्रेलिया प्रकरण के पीछे भी कहानी कुछ और तो नहीं थी?

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने अप्रत्याशित रूप से इस प्रकरण पर बहुत जल्दी कदम उठाते हुए पूरी घटना की जांच और अनुशासन कमेटी में सुनवाई निर्धारित कर दी है और तब तक हरभजन को आईपीएल में खेलने से निलंबित कर दिया है। पर यहां ज्यादा जरूरी यह सवाल है कि कहीं श्रीसंथ प्रकरण हमारे युवा खिलाड़ियों को कम उम्र में मिली दौलत और शोहरत से पैदा हुई उग्रता का प्रतीक तो नहीं है?

यही खिलाड़ी जब भारतीय टीम के तौर पर खेलते हैं, तो उनके आपसी विवाद या विरोध अपनी विपक्षी टीम को हराने के लक्ष्य के नीचे और पीछे हो जाते हैं। पर जब एक ही टीम के यही सदस्य अलग-अलग लीग टीमों के रूप में एक-दूसरे के खिलाफ खेलते हैं तो उनके आपसी मतभेद सामने आ सकते हैं। इस प्रकरण का चाहे जो भी नतीजा निकले, क्या एक ही टीम में होने पर हरभजन और श्रीसंथ का व्यवहार एक-दूसरे के प्रति सहज हो पाएगा? क्या जिस टीम इंडिया को एक बनने में इतना समय लग गया, वह प्रसिद्धि और समृद्धि की भेंट तो नहीं चढ़ जाएगी?





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