जयपुर. राज्यपाल एस.के.सिंह का मानना है कि विश्वविद्यालयों में रिसर्च (अनुसंधान) के नाम पर कोरी नकल हो रही है। जिन क्षेत्रों में काम होना चाहिए, उनमें कुछ नहीं हो रहा है। निजी विश्वविद्यालयों में रोजगार उपलब्ध कराने के लिहाज से जरूर कुछ पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं, लेकिन उनमें फीस बहुत ज्यादा है। उन्होंने कहा कि मुझे बच्चों के भविष्य की चिंता है और इसके लिए जो भी मुझसे बनेगा, वह करूंगा।
सिंह ने रविवार को ‘भास्कर’ से खास मुलाकात में कहा कर्ि ईट-गारे और सुंदर भवन बनाने से अच्छे विश्वविद्यालय नहीं बनते। इसके लिए अच्छी फैकल्टी और अच्छे शिक्षकों की जरूरत होती है। उन्होंने इस बात पर भी असंतोष जाहिर किया कि विश्वविद्यालय आज शैक्षणिक कम और राजनीति के केंद्र ज्यादा बनते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पर्यटन, माइनिंग, पुरातत्व और ऐतिहासिक धरोहर संरक्षण पर रिसर्च की बहुत ज्यादा जरूरत है। इसमें ज्यादा मेहनत होती है, खुदाई करनी पड़ती है, तब उसमें कुछ चीजें निकलती हैं। इसकी शिक्षण व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन विश्वविद्यालयों में ऐसा नहीं है।
पुरानी हवेलियों और महलों में वुडन वर्क, चौखटों, डोम और पेंटिंग तथा रंगों पर अध्ययन की गहन जरूरत है। पुरानी हवेलियों और महलों में चूना-पत्थर से काम होता था, जबकि आज हालत यह है कर्ि ईट और सीमेंट से टूट-फूट ठीक कर दी जाती है। यह खतरनाक है। आर्किटेक्ट की शिक्षा ही नहीं है।
सुरक्षा के लिए सभी सावधानियां जरूरी
राजस्थान के बॉर्डर एरिया में बड़े पैमाने पर जमीनों की खरीद-फरोख्त से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे के सवाल पर उन्होंने कहा कि सुरक्षा के लिए सभी तरह की सावधानियां जरूरी हैं। इस मामले में वे ज्यादा कुछ नहीं कहेंगे। सरकार को सलाह देना उनका काम है, जो वे कर रहे हैं।
धर्म स्वातं˜य विधेयक पर मौन
राज्य सरकार की ओर से दूसरी बार विधानसभा में पारित करके भेजे गए धर्म स्वातं˜य विधेयक के बारे में पूछे जाने पर राज्यपाल ने चर्चा करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि इस बारे में अभी कुछ नहीं बोलेंगे।
परमाणु करार देशहित में
अमेरिका के साथ परमाणु करार संधि को देशहित में बताते हुए उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दल चाहते हैं कि भारत हमेशा दबकर ही रहे तो उनके लिए अच्छा है। इसीलिए वे इस संधि का विरोध कर रहे हैं, जबकि परमाणु करार संधि से भारत को दूरगामी लाभ मिलेगा।