अजमेर.
जेल उपाधीक्षक हेमंत डंड ने तबादले के कुछ दिन बाद ऐसी गणित बैठाई कि 14 महीने से भी ज्यादा समय तक जयपुर मुख्यालय पर टिके रहे। उनका नाम अजमेर में था, जबकि वे काम जयपुर में कर रहे थे। अफसरों के मौखिक आदेश से अजमेर जेल से डंड की पगार बनकर बैंक खाते में जाती रही। भांडा फूटने पर अफसरों ने पिछले दिनों डंड को अजमेर भेज दिया, यहां से वे 10 दिन के अवकाश पर चले गए।
तत्कालीन डीजी जेल ने अजमेर सेंट्रल जेल के अफसरों को डंड को जयपुर भेजने के आदेश दिए थे। डंड ऐसे जयपुर गए कि दोबारा लौटे ही नहीं। जेल उपाधीक्षक जैसे जिम्मेदारी वाले पद पर तैनाती के फौरन बाद ही डंड को जयपुर बुलाने का अधिकार डीजी जेल को नहीं है। सरकार के आदेश के बगैर ही हेमंत डंड ने जयपुर में 14 महीने गुजार दिए।
इस बीच उनकी पगार अजमेर सेंट्रल जेल से बनकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा में उनके खाते में जमा होती रही। हेमंत डंड ने जयपुर मुख्यालय पर काम किया या नहीं यह तो मुख्यालय के अफसर ही बता सकते हैं, लेकिन अजमेर जेल में उनकी उपस्थिति का कोई हिसाब नहीं रखा गया। डंड को अवकाश पर जाना होता तो मुख्यालय के अफसर छुट्टी की अर्जिया मंजूर कर भेजते रहे।
भांडा पिछले दिनों उप सयम फूटा, जब आइजी जेल एसपी खड़गावत ने हेमंत डंड की उपस्थिति पर ऐतराज किया। वरिष्ठ अधिकारी के ऐतराज करते ही जेल विभाग के अफसरों में खलबली मच गई। पिछले दिनों आनन-फानन में हेमंत डंड को वापस अजमेर जेल भेज दिया गया।