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नकल मारकर पीएचडी करने वाले व गाइड को सजा

पुणे. किसी के शोध पत्र की नकल उतारकर पीएचडी पूरा करना कोल्हापुर के शिवाजी यूनिवर्सिटी के एक शिक्षक और उसके गाइड दोनों को महंगा पड़ा है। यूनिवर्सिटी ने नकलची शिक्षक की पीएचडी और एमफिल की डिग्रियां तो रद्द की हैं, साथ ही उसके गाइड को भी अयोग्य करार दिया है।

यूनिवर्सिटी ने यह फैसला मामले की जांच के बाद लिया है। अधिकारियों ने बताया कि 2002 में बीएल पवार ने यूनिवर्सिटी में हिंदी के विभागाध्यक्ष अजरुन चव्हाण को गाइड बनाकर ‘भीष्म साहनी के साहित्य में मानवतावाद’ विषय पर अपनी पीएचडी पूरी की थी। बाद में मुंबई के एक लेखक देवेश ठाकुर ने यूनिवर्सिटी को शिकायत की कि उनके शोध पत्र से 150 पन्नों की सामग्री की बिना अनुमति नकल उतारी गई है।

इसके बाद यूनिवर्सिटी ने अपनी विधि शाखा से परामर्श कर एक जांच समिति गठित की थी। जांच में बीएल पवार को नकल उतारकर अपनी थीसिस लिखने का दोषी पाया गया था। पवार सांगली के विलिंगडन कॉलेज में हिंदी का शिक्षक है।

* ‘मुझ पर की गई कार्रवाई अवैध है। छात्र ने थीसिस के पहले टॉपिक में साहित्यिक चोरी की है, जबकि मैंने टॉपिक चार से उसका मार्गदर्शन शुरू किया था। छात्र द्वारा की गई चोरी की सजा आखिर उसके गाइड को कैसे दी जा सकती है।’
- अर्जुन चव्हाण





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