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जरूरी था भज्जी पर प्रतिबंध

मुंबई मोहाली में किंग्ज इलेवन पंजाब और मुंबई इंडियंस के मैच की समाप्ति के बाद हुए हरभजन-श्रीसंथ विवाद पर आईपीएल ने हरभजन पर 11 मैचों का प्रतिबंध लगा कर ठीक ही किया है। राष्ट्रीय टीम के अपने साथी को थप्पड़ मारना एकदम हैरान करने वाली बात थी। अपने टीम के साथी के साथ इस तरह का बर्ताव कर हरभजन न सिर्फ अपना, बल्कि टीम, खेल और आईपीएल की इमेज को भी गंदा कर रहे थे। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड का झगड़ा करने वाले इस खिलाड़ी से नाराज होना स्वाभाविक है। यह वही खिलाड़ी है, जिसका बोर्ड पिछले ऑस्ट्रेलिया दौरे के समय बचाव कर रहा था।

वैसे कुछ लोगों का मत है कि जब दोनों खिलाड़ियों में मेल-मिलाप हो गया था, ऐसे में हरभजन को चेतावनी देकर छोड़ देना चाहिए था। पर भविष्य में इस तरह की घटनाओं की प्रवृत्ति को रोकने के लिए इस प्रकार कड़ी सजा दी जानी जरूरी है। सभी अंतरराष्ट्रीय खेल संस्थाएं खेल के मैदान में किसी तरह की हिंसा को स्वीकार नहीं करने के मामले में एक मत हैं और अगर आईपीएल इस मामले में कुछ अलग नजरिया अपनाती तो यह गलत होता।

उदाहरण के तौर पर विश्व कप फुटबॉल के फाइनल में फ्रांस के कप्तान और प्रसिद्ध खिलाड़ी जिनेडीन जिडान को भी इटली के मार्को मातेराजी को जानबूझकर सिर से धक्का मारने के कारण न सिर्फ लाल कार्ड दिखाकर मैदान से बाहर कर दिया गया था, बल्कि फीफा ने उन पर आगे खेले जाने वाले तीन प्रदर्शनी मैचों का प्रतिबंध भी लगाया था। इसका कारण यह था कि जिडान ने फाइनल के बाद संन्यास लेने की घोषणा कर दी थी। जिडान के सामने इस निलंबन के स्थान पर तीन दिन के सामुदायिक कार्य करने का प्रस्ताव भी रखा गया था।

जब दुनिया में क्रिकेट खेलने वाले सभी देशों में इस घटना को देखा गया हो, ऐसे में हरभजन को इस तरह के बर्ताव के लिए दंड दिया जाना जरूरी था। केवल इस प्रकार का दंड देकर ही आईपीएल अपनी विश्वसनीयता को विश्व स्तर पर बनाए रख सकती थी।





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