भोपाल. राजधानी में पुलिसकर्मियों द्वारा की जा रही 12 से 15 घंटे की ड्यूटी उन्हें बीमार कर रही है। आलम यह है कि उनमें से कई हाई ब्लडप्रेशर और मधुमेह से पीड़ित हैं। पिछले साल चार पुलिसकर्मियों की हार्ट अटैक और अन्य बीमारियों से मौत हो गई। इस साल फरवरी में चेतक मोबाइल के एक चालक को ड्यूटी के दौरान सीने में दर्द हुआ और उसकी मौत हो गई।
जहां एक ओर पुलिस आधुनिकीकरण पर जोर दिया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर पुलिस बल के अभाव में थाने में पदस्थ स्टाफ को औसतन 14 घंटे ड्यूटी करना पड़ती है। आपात परिस्थिति में यह अवधि और भी बढ़ जाती है। यही हालत शहर की चीता और चेतक मोबाइल के स्टाफ की है। उन्हें भी 12 घंटे से ज्यादा ड्यूटी करना पड़ रही है। अन्य जिलों की तुलना में राजधानी में पुलिसकर्मियों का ड्यूटी पर आने और जाने का समय तय नहीं है।
राजधानी होने के कारण यहां आए दिन धरना प्रदर्शनों के कारण उन्हें दिन भर धूप में खड़े होकर कानून व्यवस्था बनाए रखना पड़ती है। कई मामलों में ऐसे हालात के चलते हाई ब्लडप्रेशर, मधुमेह हृदय से संबंधित बीमारियां उन्हें घेर लेती हैं। भोपाल रेंज के लगभग दो हजार पुलिसकर्मियों का पुलिस अस्पताल के डाक्टरों ने हेल्थ परीक्षण किया था।
इसमें सामने आया था कि अधिकांश पुलिसकर्मी हाई ब्लडप्रेशर और मधुमेह से पीड़ित हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें जब आराम की आवश्यकता होती है, तब वे अपनी ड्यूटी कर रहे थे। कई पुलिसकर्मियों को यह नहीं मालूम था कि उन्हें हाई ब्लडप्रेशर या मधुमेह है। कई की आंखें भी कमजोर पाई गईं। अस्पताल के डा. एसके निगम कहते हैं कि स्वास्थ्य परीक्षण के बाद विभाग को पुलिसकर्मियों की बीमारियों से अवगत कराया गया था। डा. निगम कहते हैं कि हाई ब्लडप्रेशर, मधुमेह तथा अन्य बीमारियां काम की अधिकता या तनाव के चलते नहीं होती है।