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सिस्टम के साथ ‘शहर’ को भी बदलना होगा

इंदौर. दिल्ली और पुणो में बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम की विफलता ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इनमें से कुछ के जवाब तो तकनीकी हैं और कुछ के शहर को ही तलाशना होंगे। ऐसा समय रहते नहीं किया तो यहां भी हालात बदतर होंगे और सिस्टम बेबस हो जाएगा। हालांकि यहां के योजनाकार भरोसा दिलाते हैं कि इंदौर में चौड़ी सड़क बनाने के साथ ट्रैफिक को ठीक तरह से चलाने के लिए भी अत्याधुनिक साधन जुटाए जा रहे हैं लेकिन इन सबके लिए लोगों को जागरूक करने के मोर्चे पर अभी तक कुछ खास नहीं हुआ है।

तकनीकी उपाय : इसके दो हिस्से हैं इन्फ्रास्ट्रक्चरल विकास और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आईटीएस)

इन्फ्रास्ट्रक्चरल विकास: इसके तहत चौड़ी सड़क, फुटपाथ, साइकिल ट्रैक व पार्किग के साथ आधुनिक बस स्टॉप बनाए जा रहे हैं।

आईटीएस : इसमें बसों को चौराहों से निकालने के लिए सिगनल प्रायोरेटाइजेशन सिस्टम, बसों में आने-जाने वालों को टिकट आसानी से मिले इसलिए स्वचलित किराया संग्रहण सिस्टम, लोगों को जानकारी देने वाला सिस्टम, कौनसी बस कहां है पता लगाने के लिए जीपीएस आदि भी लगाने की तैयारी है। इसमें से कुछ तो सिटी बस के लिए उपयोग किए ही जा रहे हैं।

स्थानीय सवाल : इसमें लोगों की सड़कों पर चलने और वाहन चलाने की आदतों के साथ आवारा पशु व कॉलोनियां सड़क पर सीधे खुलने की समस्या प्रमुख है।

आवारा पशु : इस समस्या का निदान नगर निगम के पास है और वह इसे हल करने में मजबूर है।

लोगों की आदतें : सड़क पर अपनी लेन में नहीं चलना, गलत दिशा से ओवरटेक करना, कॉलोनी से तेज गति से मेनरोड पर पहुंचना जैसी आदतें समय रहते बदलना ही होंगी। प्रदेश के परिवहन आयुक्त नरेंद्र कुमार त्रिपाठी भी मानते हैं बीआरटीएस के साथ वाहन चालकों के साथ पैदल चलने वालों को भी जागरूक किया जाना चाहिए। अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड के सीईओ चंद्रमौलि शुक्ल बताते हैं आने वाले समय में लोगों को इसकी पूरी जानकारी दी जाएगी।

विफलता पुणो और दिल्ली की

पुणो- जल्दबाजी में कटराज से स्वारगेट तक महज 2.6 किलोमीटर सड़क पर निशान बनाकर बस की लेन अलग कर दी गई जिसके कारण हादसे हुए। दिल्ली- आंबेडकरनगर से मूलचंद फ्लायओवर तक 5.8 किमी हिस्से में खास सड़क तो बनाई लेकिन ट्रैफिक को ठीक तरह से चलाने के बाकी इंतजाम नहीं किए गए। इसके चलते वहां अन्य वाहन बस लेन में घुसने लगे और जाम की स्थितियां बनने लगीं।

ठीक से चल ही नहीं पाती : दिल्ली में बीआरटीएस कॉरिडोर 5.8 किलोमीटर और पुणो में 2.6 किलोमीटर से शुरू हुआ। दिल्ली में औसत व्यक्ति 9 किलोमीटर दूरी तय करता है जिसे एवरेज ट्रिप डिस्टेंस कहा जाता है। बीआरटीएस कॉरिडोर उससे भी छोटा है। इंदौर में यह पांच किलोमीटर के आसपास है।

इंदौर में उपाय: आईआईटी दिल्ली से लेकर विश्व बैंक तक के सलाहकारों की मदद। ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम के लिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस और बसों को प्राथमिकता देने के सिस्टम के लिए इम्बार्क की मदद ली जा रही है। प्रोजेक्ट के कंसल्टेंट मेहता एसोसिएट्स भी स्थानीय है, जो शहर की जरूरतों को जानते हैं।





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